प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के हितों के लिए 55 से अधिक सरकारी संगठन कर रहे काम

नवज्योति, जयपुर। प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के हितों के लिए 55 से अधिक सरकारी संगठन काम कर रहे है। इस दौरान शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर संगठन मांग उठाते है और उनको पूरा करवाने के लिए राज्य सरकार तथा शिक्षा विभाग से लड़ाई लड़ रहे है। संगठन सरकार के खिलाफ ज्ञापन देने के साथ ही धरना-प्रदर्शन भी कर रहे है। साथ ही शिक्षक संगठन सरकारी विद्यालयों में सुधार के लिए और बेहतर पढ़ाई के लिए भी काम करते है। इन सभी संगठनों को सरकार का शिक्षा विभाग मान्यता देता है। प्रदेशभर में राज्य स्तरीय शैक्षणिक सम्मेलन शुक्रवार से शुरू हो गए है, जो 20 जनवरी तक आयोजित होगा। इन दोनों दिनों सरकारी स्कूलों में अवकाश है।

शिक्षकों की मांगें और समस्याएं 
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले किया जाए, गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए, विभिन्न वेतन आयोग लागू करने के दौरान रही वेतन विसंगतियों का निस्तारण किया जाए, कर्मोन्नत  विद्यालयों तथा महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में 2021 से पदों की स्वीकृति नहीं होने से राजस्थान के लगभग 15000 शिक्षकों को सितंबर 2023 से वेतन की भारी समस्या है। संविदा शिक्षकों को शीघ्र स्थाई किया जाए। पिछले तीन सालों में सरकार की ओर से वरिष्ठ अध्यापक ,व्याख्याता शिक्षा अधिकारियों की पदोन्नति नहीं करने से हजारों की संख्या में स्कूलों और कार्यालयों में पद खाली, प्रदेश के स्कूलों में 20 हजार से अधिक शिक्षक अधिशेष चल रहे, हजारों शिक्षकों को तीन से चार महीने से वेतन की समस्या से जूझना पड़ता है। 

शिक्षक सम्मेलनों में  शैक्षिक गतिविधियों व शैक्षिक तकनीक का  मंथन करते हैं। एक समेकित मांग पत्र तैयार होता है, जो राज्य सरकार को प्रेषित होता है।
-शशि भूषण शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान प्रा. एवं मा. शिक्षक संघ

तत्कालीन सरकार ने शिक्षक समस्याओं के निस्तारण को लेकर गंभीरता नहीं बरती। शिक्षक समाज उद्वेलित था अब  नई सरकार से शीघ्र निस्तारण का आग्रह है।
-रमेशचंद्र पुष्करणा,  प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय