कोटा । प्रदेश के स्कूलों में 24 जून से नया सत्र शुरू होने वाला है। शिक्षा विभाग की ओर नए सत्र में होने वाले प्रवेशोत्सव को लेकर तैयारियों भी शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित हुई बैठक के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच कई बिंदुओं पर चर्चा की गई जिसमें प्रमुख बिंदु सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने का रहा। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार विभाग ने सभी सरकारी विद्यालयों में पिछले सत्र की तुलना में इस सत्र में 20 फीसदी अधिक नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ताकि अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ सकें। लेकिन पिछले दो सत्रों के आंकड़ों पर गौर करें तो सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ने के स्थान पर घटा है।
पिछले तीन साल में घटा नामांकन
कोटा जिले सभी सरकारी विद्यालयों को मिलाकर कुल 1 हजार 56 विद्यालय संचालित हैं। विभाग की ओर से हर साल जारी होने वाली रिपोर्ट के आंकड़े ही विभाग के दावों की पोल खोल देते हैं। इन सभी विद्यालयों में नामांकन की स्थिति पर गौर करें तो विभाग के खुद के आंकडें बताते हैं कि पिछले तीन सत्रों से इन विद्यालयों में नामांकन कम होता जा रहा है, जिसमें हर कक्षा वर्ग शामिल हैं। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार कोटा के सरकारी विद्यालयों में सत्र 2021-22 के दौरान सभी कक्षाओं को मिलाकर कुल 1 लाख 84 हजार 949 था, जो सत्र 2022-23 के दौरान घटकर 1 लाख 74 हजार 852 रह गया। वहीं शाला दर्पण के अनुसार जिले के सरकारी विद्यालयों में गत सत्र 2023-24 के दौरान विद्यार्थियों की कुल संख्या 1 लाख 12 हजार 337 है। विभाग की ही रिपोर्ट के अनुसार विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, जो चिंताजनक बनी हुई है।
20 फीसदी नामांकन बढ़ाने के बाद भी नहीं होगी भरपाई
सरकारी विद्यालयों में घटते नामांकन को रोकने के लिए विभाग की ओर से हर साल प्रवेशोत्सव मनाया जाता है। लेकिन विद्यालयों में नामांकन बढ़ने के स्थान पर घटता जा रहा है। जिसका जवाब विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। वहीं दूसरी ओर अगर विभाग की ओर से इस सत्र के दौरान पिछली बार की तुलना में 20 फीसदी नामांकन बढ़ा भी दिया जाएगा। तो भी पिछले सत्रों के की बराबरी नहीं हो पाएगी। ऐसे में क्या शिक्षा विभाग खाली अपनी पीठ थपथपाने के लिए आंकड़ों का खेल रहा है।
शिक्षकों और सुविधाओं की कमी सबसे बड़ा कारण
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ही कोटा के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के करीब 2 हजार पद खाली पड़े हैं। जिनमें कई पद ऐसे हैं जो कठिन माने जाने वाले विषयों से जुड़े हैं। कोटा जिले में 564 तृतीय श्रेणी, 4245 द्वितीय श्रेणी और 275 पद प्रथम श्रेणी के खाली पड़े हैं। इनमें संस्कृत, विज्ञान, भौतिकी, गणित के शिक्षकों के पद सबसे ज्यादा खाली हैं। इसके अलावा कई विद्यालयों में आज भी मूलभूत सुविधाएं मौजूद नहीं है। जो भी नामांकन घटने का एक बड़ा कारण है।
विद्यार्थी का कहना है
मेरा नामांकन कंसुआ सरकारी स्कुल में था मुझे संस्कृत भाषा में पढ़ाई करनी थी। लेकिन विद्यालय में संस्कृत का कोई अध्यापक ही नहीं है। इसलिए मजबूरी में दुसरी जगह प्रवेश लेना पड़ा।
-रामकरण योगी, कंसुआ
सरकारी विद्यालय में नामांकन तो है लेकिन केमिस्ट्री और फिजिक्स सब्जेट हैं और इनके लिए विद्यालय में पर्याप्त लैब नहीं है। इसकी वजह से काफी परेशानी होती है।
-सुनील मीणा, बोराबास
इनका कहना है
नामांकन कम होना चिंताजनक है जिसे बढ़ाने के लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इस बार विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं। वहीं नामांकन बढ़ाने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर सम्मानित करने की योजना बनाई है। वहीं जो बच्चे ड्रॉप कर गए हैं उन्हें भी पुन: प्रवेश दिलाने की कोशिश की जाएगी।
-के के शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, कोटा
