बेसहारा महिलाओं को 'भिटौली' देगा बुरांश फाउंडेशन, युवाओं को भी करेगा जागरूक
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Bageshwar News: भिटौली परंपरा में भाई अपनी बहन को या पिता अपनी बेटी को मायके में भेंट (उपहार) भेजते हैं, जिससे वे यह दिखा सकें कि वे अपनी बहन या बेटी को मायके से दूर होने के बावजूद याद रखते हैं, उनसे प्यार करते…और पढ़ें
भिटौली की परंपरा चैत्र महीने में निभाई जाती है.
बागेश्वर. उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में एक अनोखी परंपरा भिटौली (भेंट) वर्षों से चली आ रही है. चैत्र महीने में यह परंपरा विशेष रूप से भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का एक खास तरीका है. इस महीने में विवाहित बेटियों और बहनों को मायके से उपहार भेजे जाते हैं, जिनमें मिठाइयां, वस्त्र, अनाज, पैसे और अन्य सामग्री शामिल होती हैं. बागेश्वर जिले में इस बार बुरांश फाउंडेशन ने एक अभिनव पहल की है, जिसमें वे न सिर्फ बेसहारा महिलाओं को भिटौली देंगे बल्कि युवाओं को भी इस परंपरा के लिए जागरूक करेंगे ताकि भावी पीढ़ी को भी पहाड़ की परंपराओं के बारे में जानकारी हो सके.
बुरांश फाउंडेशन के संस्थापक गिरीश पंतोला ने लोकल 18 को बताया कि उनकी यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और पारंपरिक रीति-रिवाजों के महत्व को बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है. हमारा लक्ष्य है कि हम इस भिटौली परंपरा को सिर्फ संजोएं ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी इसके महत्व से परिचित कराएं. इसके अलावा हम जिले की निराश्रित महिलाओं को भी भिटौली के रूप में सहारा देंगे. बीते वर्ष भी फाउंडेशन की ओर से महिलाओं को भिटौली दी गई थी. ठीक उसी प्रकार इस बार भी दी जा रही है. जिले की स्थानीय महिलाओं ने भी इस पहल की सराहना की है. इसके तहत फाउंडेशन बागेश्वर जिले के विभिन्न स्कूलों में जाकर यंग जेनरेशन को भिटौली परंपरा के बारे में जागरूक करेगा. फाउंडेशन का मानना है कि वर्तमान समय में पारंपरिक परंपराओं की महत्ता को समझना और उसका पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह परंपरा केवल उपहार देने का ही माध्यम नहीं है बल्कि यह भाई-बहन के रिश्ते को भी मजबूत करती है और समाज में एकता का संदेश देती है.
परंपराओं को जीवित रखना उद्देश्य
भिटौली परंपरा में भाई अपनी बहन को या पिता अपनी बेटी को मायके में उपहार भेजते हैं, जिससे वे यह दिखा सकें कि वे अपनी बहन या बेटी को मायके से दूर होने के बावजूद याद रखते हैं. यह परंपरा रिश्तों में स्नेह और एकता को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण तरीका मानी जाती है. बुरांश फाउंडेशन का यह कदम एक सकारात्मक दिशा की ओर है, जिसमें पारंपरिक परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ जरूरतमंद महिलाओं को सहायता प्रदान की जाएगी. यह पहल एक सामाजिक जागरूकता अभियान का हिस्सा बनती है, जो न केवल परंपरा को सहेजने का काम करेगी बल्कि समाज की बेसहारा महिलाओं के उज्जवल भविष्य की दिशा में भी मददगार साबित होगी.