युवाओं को नशे से बचाने की मुहिम : नायब सैनी ने ड्रग फ्री हरियाणा साइक्लोथॉन को दिखाई हरी झंडी, कहा- नशा-मुक्त प्रदेश बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध 

चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार नशा मुक्त हरियाणा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सैनी प्रदेश को नशा मुक्त करने और युवाओं को नशे से बचाने की मुहिम के तहत हिसार से ड्रग फ्री हरियाणा साइक्लोथॉन 2.0 को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए बोल रहे थे। वह खुद फैकेल्टी क्लब से साइकिल चलाकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे और इसके उपरांत प्रतिभागियों के साथ साइक्लोथॉन का हिस्सा बने। इस यात्रा में स्कूलों, महाविद्यालयों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों से युवाओं के अलावा सेना, पुलिस, एनसीसी, एनएसएस तथा अन्य संस्थाओं के सदस्यों ने भाग लिया। 

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आज हरियाणा के युवाओं ने यह संकल्प लिया है कि हरियाणा से नशे को जड़ से समाप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा के बारे में एक प्रसिद्ध कहावत है -‘देसा मां देश हरियाणा, जित दूध दही का खाना। उन्होंने कहा कि हरियाणा की शान पहलवानी है, हमारा धाकड़ पहलवान, हमारा धाकड़ जवान, हमारा धाकड़ किसान, यही हरियाणा की पहचान है, इसलिए हरियाणा में नशे के लिए कोई स्थान नहीं है। नशा मुक्त हरियाणा बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज से अगले तीन सप्ताह तक यह साइक्लोथॉन रैली हरियाणा के एक-एक गांव में जाकर हरियाणा को नशा मुक्त करने के लिए नागरिकों को जागरूक करने का काम करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की लत एक चुनौती बनकर उभर रही है। कई बार फैशन की खातिर या दोस्तों के उकसाने पर युवा नशे की लत का शिकार हो जाता है। नशीले पदार्थ केवल सेहत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज और देश के लिए भी घातक होते हैं। नशे की वजह से छोटे अपराधों से लेकर हथियारों की तस्करी और पैसे के अवैध लेनदेन जैसे बड़े अपराध भी हो रहे हैं। यह एक गंभीर समस्या है। इसलिए सब को मिलकर नशा मुक्त हरियाणा बनाने का संकल्प लेना होगा। सैनी ने कहा कि युवाओं और किशोरों को नशे से बचाने के लिए सरकार ने राज्य कार्य योजना शुरू की है। इस योजना के तीन पहलू हैं। पहला जन जागरूकता अभियान, दूसरा नशा मुक्ति व पुनर्वास और तीसरा नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई। राज्य सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स का भी गठन किया है। नशे के दुष्प्रभाव के प्रति जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और भटके हुए युवाओं को उपचार और पुनर्वास करके उनको समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 52 नशा मुक्ति केंद्र खोले गए हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में  नशा मुक्ति वार्ड स्थापित किए गए हैं। इनके अलावा 13 जिलों के सिविल अस्पतालों में भी नशा मुक्ति केंद्र बनाए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नशा करने वालों के लिए उपचार और परामर्श सुविधाओं को सु²ढ़ बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, नशे के खिलाफ इस मुहिम में ग्राम पंचायत और सरपंचों की भी सहभागिता सुनिश्चित की है ताकि हर गांव से नशे को जड़ से खत्म कर सकें। उन्होंने कहा कि नशा पीड़तिों की मदद करने और ड्रग पेडङ्क्षलग की गतिविधियों के बारे में जनता से जानकारी एकत्रित करने के लिए सरकार ने एक टोल फ्री नंबर 90508-91508 भी जारी किया है। इसके साथ-साथ एक मानस पोर्टल भी बनाया है और इस मानस पोर्टल पर कोई भी व्यक्ति नशा तस्करों या उसमें संलिप्त लोगों की जानकारी दे सकता है। जानकारी देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा। 

उन्होंने कहा कि सरकार ने नशा तस्करी में संलिप्त लोगों की संपत्तियों को अटैच करते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। अपराधियों, पीड़तिों और ड्रग से संबंधित सभी गतिविधियों का केंद्रीकृत राज्य डेटाबेस बनाने के लिए हॉक सॉफ्टवेयर तथा मोबाइल ऐप प्रयास विकसित किया गया है। इसके अलावा, बच्चों और युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए धाकड़ कार्यक्रम स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाने के लिए हरियाणा में जिला रेंज और राज्य स्तरीय एंटी नारकोटिक्स सेल भी स्थापित किए हैं। 

 

By admin