हर कोने में झुंड, हर घर में डर! अल्मोड़ा में बंदर और कुत्तों ने फैलाई दहशत
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Almora Latest News: अल्मोड़ा में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक लोग डर के साए में जी रहे हैं. प्रशासन की नसबंदी कोशिशों के बावजूद समस्या बढ़ती जा रही है. लोग जल्द से …और पढ़ें
बंदर और आवारा कुत्तों की फोटो.
हाइलाइट्स
- अल्मोड़ा में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ा.
- बच्चे और बुजुर्ग हमलों से घायल हो रहे हैं.
- लोग डंडा लेकर बाहर निकलने को मजबूर हैं.
अल्मोड़ा: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में इन दिनों आवारा कुत्तों और काट खाने वाले बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है. शहर की हर गली और मोहल्ले में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे लोगों पर हमले के मामले भी बढ़े हैं. कई बार लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. नगर पालिका और वन विभाग की ओर से कई बार बधियाकरण (नसबंदी) भी करवाई गई है, लेकिन इसके बावजूद इनकी तादाद दिन-ब-दिन बढ़ रही है.
बच्चों से बुजुर्ग तक खतरे में
स्थानीय निवासी अजयमित्र सिंह बिष्ट ने बताया कि शहर में कुत्तों और बंदरों की बढ़ती संख्या अब बड़ी चिंता का विषय बन गई है. कई बार इनकी वजह से बच्चे और बुजुर्ग घायल हो चुके हैं. कई लोगों के हाथ-पैर टूट चुके हैं, तो कुछ को जान से भी हाथ धोना पड़ा है. उनका कहना है कि इन जानवरों के लिए किसी सुरक्षित जगह पर एक बड़ा केंद्र बनना चाहिए, जहां इन्हें रखा जा सके. इसके लिए सरकार और प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.
स्कूल जाने में डर, हाथ में डंडा लेकर निकल रहे लोग
स्थानीय निवासी गिरीश धवन ने बताया कि बंदरों और कुत्तों की बढ़ती संख्या अब गंभीर समस्या बन चुकी है. छोटे बच्चे अब अकेले स्कूल या पार्क नहीं जा पाते. माता-पिता को खुद उन्हें छोड़ने और लाने आना पड़ता है. उन्होंने बताया कि अगर बंदर किसी घर से एक बार कुछ सामान उठा ले जाए, तो वहीं आसपास अपना ठिकाना बना लेते हैं. पहले बंदर कुछ ही मोहल्लों तक सीमित थे, लेकिन अब पूरा अल्मोड़ा इनसे परेशान है. गिरीश का कहना है कि सिर्फ कुत्तों ही नहीं, बंदरों की भी नसबंदी जरूरी है. लोग रात में अकेले निकलने से डरते हैं और हाथ में डंडा लेकर ही बाहर निकलते हैं.
बंदर घर में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं
स्थानीय निवासी भास्कर साह ने बताया कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अल्मोड़ा का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो जहां बंदरों का आतंक न हो. जैसे ही आप घर की खिड़की या दरवाजा खोलते हैं, बंदर अंदर घुसकर सामान ले जाते हैं. वहीं, कुत्तों की संख्या भी इतनी ज्यादा हो गई है कि हर गली में झुंड के झुंड नजर आते हैं. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस पर सख्ती से ध्यान दिया जाए. उनका यह भी आरोप है कि बाहर से बंदरों को लाकर अल्मोड़ा में छोड़ा जा रहा है, जिससे संख्या और ज्यादा बढ़ गई है.
हर कोई परेशान, डर का माहौल
स्थानीय निवासी सारांश का कहना है कि अल्मोड़ा में बंदरों के साथ-साथ आवारा कुत्तों की संख्या भी काफी बढ़ चुकी है. उन्होंने सरकार, प्रशासन और वन विभाग से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाए. उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोग तक अब डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं.