1207 प्राइवेट स्कूलों का अटका 22.50 करोड़ का भुगतान

कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-आरटीई के दायरे में आने वाले कोटा जिले के 1 हजार से अधिक निजी स्कूलों का 22 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान अटक गया है। जिससे प्रावइेट स्कूलों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। जबकि, शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष मार्च समाप्ती से पहले ही सभी पेंडिंग बिल बनाकर ट्रेजरी भिजवा दिए थे। जहां से बिल पास भी हो गए लेकिन वित्त विभाग जयपुर से ईसीएस नहीं होने के कारण स्कूलों का भुगतान अटक गया। 

क्या है मामला
कोटा जिले में डीओ सैकंडरी व डीओ एलीमेंट्री को मिलाकर कुल 1207 प्राइवेट स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका सत्र 2021-22 की प्रथम व द्वितीय, 2022-23 की प्रथम व द्वितीय तथा 2023-24 की प्रथम किस्त को मिलाकर कुल तीन सत्र की 22.50 करोड़ रुपए की आरटीई पुनर्भरण राशि का बिल शिक्षा विभाग ने गत 26 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही बनाकर ट्रैजरी पहुंचा दिए थे। ट्रेजरी से भी बिल पास होकर वित्त विभाग जयपुर पहुंच गए। जहां से ईसीएस नहीं होने से बिल अटक गए। जिसकी वजह से संबंधित निजी स्कूलों के बैंक खातों में पुनर्भरण की राशि नहीं आ सकी। जबकि, वर्ष 2022-23 का वित्तीय वर्ष भी पूरा हो चुका है। लेकिन, पिछले तीन सत्रों के पैंडिंग बिलों का प्राइवेट स्कूलों को भुगतान नहीं हो सका। 

क्या होता है ईसीएस
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ईसीएस का मतलब इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से संस्थाएं अपने बैंक को नियमित रूप से इलेक्ट्रोनिक लेनदेन की अनुमति देने के लिए अधिकृत करती है। इसका उपयोग आमतौर पर बिलों, ऋणों, बीमा प्रमियमों और अन्य आवर्ती खर्चों के स्वचलित भुगतान के लिए किया जाता है। 

डीओ सैकंड्री के 14 व एलीमेंट्री के 8 करोड़ अटके
डीओ सैकंडी में 548 निजी स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका पिछले सत्र 2021 से 2024 तक के साढ़े 14 करोड़ रुपए का आरटीई पुनर्भरण बिल बना है, जिसका भुगतान वित्त विभाग से ईसीएस न होने के कारण अटक गए। जबकि, डीओ एलीमेंट्री में 659 निजी स्कूल आरटीई में आते हैं, जिनकी पुनर्भरण राशि 8 करोड़ रुपए है। इनके बिलों का भुगतान भी ईसीएस नहीं होने के कारण स्कूलों को नहीं हो पाया। 

उधार मांगकर चला रहे स्कूल
सरकार द्वारा समय पर पिछले तीन सत्र के आरटीई की पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं किए जाने से निजी स्कूलों पर आर्थिक संकट आ गया है। शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही सभी पैंडिंग बिल बनाकर कोषालय में भिजवा दिए लेकिन, वित्त विभाग से ईसीएस नहीं होने से हमारा भुगतान अटक गया। जिसकी वजह से शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारियों, का मानदेय, बिजली का बिल, बिल्डिंग किराया व स्टेशनरी सहित स्कूल संचालन की कई व्यवस्थाएं चरमरा गई। हालात यह हैं, पिछले तीन सत्र से अधिकतर स्कूलों को आरटीई पुनर्भरण का एक पैसा नहीं मिला। जिसकी वजह से संचालकों को उधार मांगकर स्कूल चलाना पड़ रहा है। पहले ही सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ रहे आरटीई चयनित विद्यार्थियों की फीस नहीं दे रही। लेकिन, जो कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों का पैसा तो समय पर दे। सरकार की लेटलतीफी के कारण प्राइवेट स्कूल आर्थिक संकट से गुजर रहा है। 
– जमना शंकर प्रजापति, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति

स्कूल आ रहे परेशानी में 
सत्र 2021 से 2024 तक के आरटीई पुर्नभरण की राशि अब तक निजी स्कूलों को नहीं मिली। जिससे स्कूल का संचालन करना मुश्किल हो गया है। जबकि, हर साल आरटीई अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन दे रहे हैं। नर्सरी से कक्षा आठवीं तक आरटीई में विद्यार्थियों का एडमिशन होता है। हर स्कूल के पास 150 से 200 बच्चे होते हैं। जिनकी पुर्नभरण फीस समय पर नहीं मिलने से कई तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं। यदि, सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई में चयनित विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण नहीं करती है तो वर्तमान सत्र में इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दिया जाएगा। 
– सत्यप्रकाश शर्मा, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति

इनका कहना है
सरकार द्वारा आरटीई में चयनित बच्चों को किताबें खरीदने के लिए स्कूलों को 202 रुपए दिए जाते हैं। यह पैसा पुनर्भरण राशि के साथ स्कूल को प्रथम किस्त में दिया जाता है। वर्तमान सिलेबस के अनुसार 202 रुपए में एक या दो ही किताब आ सकती है। जबकि, सरकारी विद्यालयों की किताबों का बाजार मूल्य 700 से 800 रुपए के बीच होता है। ऐसे में आरटीई के विद्यार्थियों की किताबों का आर्थिक भार अभिभावकों पर पड़ता है। ऐसे में कई बार अभिभावक व स्कूल संचालक के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। छात्रहित में सरकार को पुनर्भरण राशि सहित किताबों का शुल्क भी बढ़ाकर देना चाहिए। इसके अलावा पिछले तीन सत्रों की बकाया पुनर्भरण राशि जल्द से जल्द स्कूल संचालकों को उपलब्ध करवानी चाहिए। 
– कपिल विजय, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति

क्या कहते हैं अधिकारी
शिक्षा विभाग ने जारी बजट वित्तीय वर्ष 2022-23 के आरटीई के बिल 2021-22 व 2022-23 की प्रथम व द्वितीय और 2023-24 की प्रथम किस्त के भुगतान स्वीकृति आदेश गत  26 मार्च को सभी बिल बनाकर ट्रेजरी भेजवा दिए थे। वहां से बिल पास भी हो गए लेकिन जयपुर वित्त विभाग से ईसीएस नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाए। 
– केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग

सभी विद्यालयों की पुनर्भरण राशि के बिल समय पर ट्रैजरी भिजवा दिए गए थे। जहां से बिल पास भी हो गए। लेकिन, ईसीएस नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों के खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। जल्द ही होने की उम्मीद है। 
– यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा विभाग