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Uttarakhand News : ये कहानी है दिल्ली में रहने वाले पीके मिश्रा नाम के शख्स की. पिछले साल नवंबर में उनके व्हॉट्सएप पर एक मैसेज आया. मैसेज देखते ही उनके होश उड़ गए. मैसेज में उनकी नौकरी का ऑर्डर था लेकिन यह ऑर्डर…और पढ़ें

नाम में गफलत की वजह से नहीं मिली नौकरी, 20 साल बाद शख्स ने हाईकोर्ट में दी नियुक्ति को चुनौती

हाइलाइट्स

  • 20 साल पुराने नौकरी के ऑर्डर पर हाईकोर्ट पहुंचे पवन मिश्रा.
  • कुमाऊं यूनिवर्सिटी से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर याचिका दायर.
  • हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को यूनिवर्सिटी से दस्तावेज मांगे.

देहरादून. नवंवर 2024 में पवन कुमार मिश्रा को व्हॉट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से मैसेज मिला. मैसेज में कुमाऊं यूनिवर्सिटी की ओर से जारी ऑर्डर था. ऑर्डर लगभग 20 साल पुराना था जिसमें कहा गया था ‘आपके नाम उन चार लोगों में शामिल है, जिन्हें फिजिक्स विभाग में टीचर पोस्ट पर चयनित किया गया है.’ ऑर्डर 28 फरवरी, 2005 का था लेकिन पवन कुमार मिश्रा को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. आगे जांच करने पर पता चला कि उनकी पोस्ट प्रमोद कुमार मिश्रा नाम के अन्य व्यक्ति को दी गई है. दोनों मिश्रा इंटरव्यू में देने आए थे. पवन कुमार मिश्रा इस बात से हैरान थे कि उन्हें इतने साल तक ऑर्डर क्यों नहीं मिला. उन्होंने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से बात की तो आश्वासन मिला कि मामले की जांच की जाएगी. जब यूनिवर्सिटी में कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने आरटीआई डाल दी.

उन्हें यह भी पता चला कि 3 मार्च 2005 में यूनिवर्सिटी की ओर से एक शुद्धिपत्र जारी किया था, जिसमें पवन कुमार मिश्रा की जगह प्रमोद कुमार मिश्रा का चयन होने की बात कही गई. यूनिवर्सिटी की कार्रवाई से संतुष्ट न होने पर पवन मिश्रा ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका लगाई. याचिकाकर्ता पवन मिश्रा ने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति तत्कालीन रजिस्ट्रार, डीन (विज्ञान), विभागाध्यक्ष (भौतिकी) और विश्वविद्यालय के अन्य कर्मचारियों की मिलीभगत से की गई थी. अब हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 को कुमाऊं यूनिवर्सिटी से नियुक्ति से संबंधित सभी दस्तावेज रिकॉर्ड में पेश करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी.

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पवन मिश्रा पिछले 25 साल से दिल्ली में रह रहे हैं और गाजियाबाद के इंदिरापुरम में आईआईटी की तैयारी करवाने वाले एक कोचिंग सेंटर में पढ़ाते हैं. गोरखपुर के रहने वाले पवन मिश्रा ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में मास्टर किया था. उन्होंने यूजीसी नेट भी क्वालिफाइ किया है.

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इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में पवन मिश्रा ने कहा, ‘मैं उस जॉब के लिए क्वालिफाइड था. मैं उससे पहले यूपी सैनिक स्कूल लखनऊ में टीचर था. मेरा इंटरव्यू 15 मिनट चला था. मुझे पूरा भरोसा था कि मेरा चयन होगा. मैं भूलवश यूनिवर्सिटी चेक करने नहीं गया. 110 लोगों ने जॉब के लिए अप्लाई किया था. इसमें से 58 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. पीके मिश्रा को भी बुलाया गया था.’ इधर, पीके मिश्रा ने मामला अदालत में होने का हवाला देते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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