3 साल बाद दिखेगा बैकुंठ चतुर्दशी मेले का वैभव, इस तारीख से होगी शुरुआत
कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल.उत्तराखंड अपनी सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, यहां के स्थानीय मेलों में देवभूमि की संस्कृति देखने को मिलती है. नवरात्रों के बाद से ही गढ़वाल क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में मेलो का आयोजन होता है, इनमें से कई ऐसे पौराणिक मेले हैं जिन्हें वापस जीवंत करने का प्रयास किये जा रहे हैं. ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के लिए पूरे गढ़वाल क्षेत्र में पहचाने जाने वाला बैकुंठ चतुर्दशी मेले का खोया हुआ वैभव वापस लौटने वाला है. लम्बे समय के बाद इस वर्ष बैकुंठ चतुर्दशी मेला धूमधाम के साथ आयोजित किया जायेगा.
मेले के आयोजन को लेकर कवायदें तेज हो गई है. जिला प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गया है, साथ ही मेले को किस तरह भव्य स्वरूप दिया जाये इसके लिए भी रूपरेखा तैयार की जा रही है. दिवाली के 13 दिनों बाद बैकुंठ चतुर्दशी के दिन से बैकुंठ चतुर्दशी मेला आयोजित किया जाता है. इस वर्ष 25 नवम्बर से मेले का आयोजन होगा. कोरोना के चलते व जी एण्ड आईटीअसई मैदान के रेलवे परियोजना में चले जाने के बाद 2020 से मेला श्रीनगर गढ़वाल में आयोजित नहीं हो पाया था.
आवास विकास की भूमि पर आयोजित होगा मेला
सात दिनों तक होने वाले इस मेले की तैयारियों में प्रशासन जुट गया है, स्थानीय विधायक व शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देशन में यह मेला नये स्वरूप में आयोजित हो रहा है. इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन को सौपींं गई है. जिलाधिकारी पौड़ी डॉ आशीष चौहान ने कहा कि मेले के आयोजन को लेकर अब भूमि का चयन भी शुरू कर दिया गया है. इसके लिए भक्तियाना में आवास विकास की खाली पड़ी भूमि पर खेल तमाशा एवं विकास प्रदर्शनियों के आयोजन पर मंथन चल रहा है जबकि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर के खेल मैदान व श्रीकोट स्टेडियम में स्कूली बच्चों की खेल कूद प्रतियोगिता आयोजित करने की कवायदें चल रही है.
ऐतिहासिक व सांस्कृतिक है मेले का महत्व
बैकुंठ चतुदर्शी मेला गढ़वाल के पुराने मेलों में से एक है, इसका ऐतिहासिक इतिहास होने के साथ सांस्कृतिक महत्व भी है. यहां एक ही मेले में गढ़वाल के 7 जिलों की संस्कृति देखने को मिलती है. इसके अलावा औद्योगिक विकास को भी यह मेला प्रोत्साहित करता है. मेले में रूद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, पौड़ी से भी बड़ी संख्या में लोग पहुॅचते हैं. इसके अलावा मेले में स्टार नाइट, गढ़वाली स्टार नाइट, कव्वाली नाइट, श्रीनगर के सितारे समेत अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम मेले की शोभा बढ़ाते हैं.
पूर्व में यहां लगता था मेला
श्रीनगर स्थित राम लीला मैदान में पहले मेला आयोजित होता था, मेले के बढ़ते स्वरूप के बाद इसे G & ITI ग्राउंड में शिफ्ट किया गया. अब ग्राउंड रेलवे विभाग के अधीन हो चुका है. जिस कारण यह मेला कोरोनाकाल के बाद से आयोजित नहीं हो पाया है, लेकिन अब मेला आवास विकास की जमीन पर आयोजित होगा. वहीं पहले दिन कमलेश्वर महादेव में पूजा अनुष्ठान के बाद दूसरे दिन से यह मेला आयोजित होगा.
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FIRST PUBLISHED : November 1, 2023, 23:04 IST