Nainital: जर्जर हालत में 60 से ज्‍यादा प्राथमिक स्कूल और इंटर कॉलेज, हादसों को दे रहे दावत!


रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल जिले के प्राथमिक स्कूल और इंटर कॉलेज के भवन जर्जर हालत में हैं. छात्र इन भवनों की जर्जर छतों के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. सरकार की तरफ से भले ही शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े बदलाव करने की बात कही जा रही हो, लेकिन धरातल पर हालात तो कुछ और ही कहते हैं. वहीं, बीते दिनों चंपावत जिले के मौनकांडा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय के शौचालय की जर्जर छत ढहने से एक 8 साल के बच्चे की मौत और 5 बच्चे गंभीर रूप से घायल होने के बाद स्‍कूलों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

नैनीताल जिले के करीब 60 से 65 प्राइमरी स्कूल और इंटर कॉलेज के भवन खस्ताहाल हैं. वहीं, जिले के 8 विकासखंडों में सरकारी स्कूलों के हालात भी ठीक नहीं हैं. कहीं दीवारों पर दरारें पड़ी हुई हैं, तो कहीं जमीन धंस रही है. कहीं तो स्कूलों की छतों से प्लास्टर की पपड़ी गिर रही है. बरसात के दौरान अक्सर इन जर्जर भवनों में अनहोनी का डर बना रहता है.

नैनीताल के मुख्य शिक्षाधिकारी केएस रावत ने बताया कि नैनीताल जिले में मौजूद स्कूल के जर्जर भवनों को ठीक करवाने के लिए प्रस्ताव बनाए गए हैं, जिन्हें स्वीकृत किया गया है. जल्द ही सभी भवनों को दुरुस्त किया जाएगा. इसके साथ ही सभी जर्जर भवन वाले स्कूल के प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि जिन भवनों की हालत बेहद खराब है वहां छात्रों को पढ़ने के लिए न बैठाएं और उसका चिह्नीकरण कर सूची उपलब्ध कराई जाए.

भीमताल के विधायक ने कही ये बात
भीमताल के विधायक राम सिंह कैड़ा का कहना है कि चंपावत जैसा दर्दनाक हादसा नैनीताल जिले में न हो, इसके लिए सभी जर्जर हालत वाले स्कूलों को चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि जिन भवनों को ठीक नहीं किया जा सकता है, उन्हें नैनीताल जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल से तुड़वाने की इजाजत मांगी जाएगी.

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