हिना आज़मी
देहरादून. गतका एक पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट फॉर्म है, जो ऐतिहासिक रूप से सिख गुरु के साथ जुड़ा हुआ है और जनता के बीच लोकप्रिय है. यह एक साहसिक खेल के रूप में जाना जाता है. भारत के बीर खालसा ग्रुप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 40 देशों में इसका प्रदर्शन किया है. यूनाइटेड सिख फेडरेशन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि गतका एक पारंपरिक सिख मार्शल आर्ट फॉर्म है, जिसे ऐतिहासिक रूप से सिख गुरुओं के साथ जोड़ा जाता है.
श्री हर गोविन्द साहिब के दौर में शुरू हुआ था गतका
यूनाइटेड सिख फेडरेशन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि गतका शब्द के जन्मदाता सिखों के छठे गुरु श्री हर गोविंद साहिब जी को ही माना जाता है, जिन्होंने सिखों को युद्ध कलाएं सिखाने और सैन्य परीक्षण के लिये प्रेरित किया. तभी से गतका सिख योद्धाओं की पारंपरिक जंग की शैली के रूप में विकसित हुआ, जिस कारण गुरु हर गोविंद जी को मीरी पीरी के बादशाह कहा जाता है.
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यह शैली आगे बढ़ते हुए सन 1675 – 1707 के दौरान जब कुछ सियासत के स्वार्थी बादशाहों का गरीब जनता पर जबर जुल्म चरम पर था, तब उनसे मुकाबला करने के लिए सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह ने सिख फौज को तैयार कर गतका कला को अनिवार्य कर अपने अनुयाइयों को योद्धा बनाया और आह्वान किया “सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गोबिंद सिंह नाम कहाऊं” और कहा कि तलवार जुल्म के खिलाफ और दीन दुखी की रक्षा के लिए ही उठानी है. आज गतका कला परंपरा एक साहसिक खेल के रूप में उभर रही है. विभिन्न धार्मिक एवं संस्कृति उत्सवों पर गतका कला का शस्त्र संचालन व प्रदर्शन किया जाता है.
अमरजीत सिंह ने बताया कि गतका 550 वर्ष पुराना पारंपरिक खेल है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के रूप में लोगों तक पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि “बीर खालसा ग्रुप” जैसे जत्थे ने देश के बड़े चैनलों के साथ-साथ विश्व के लगभग 40 देशों में अपनी इस कला को दिखाकर लोगों को चौंकाया है. साथ ही बीर खालसा ग्रुप ने गतका में गिनीज रिकॉर्ड व अन्य विश्व रिकॉर्ड स्थापित किए हैं.
कलर्स टीवी के शो हुनरबाज से लेकर 2019 में प्रसारित हुए विदेशी टीवी चैनल पर “अमेरिकाज गॉट टैलेंट” में अपने स्टंट का बेहतरीन प्रदर्शन कर “बीर खालसा ग्रुप” ने लोगों को चौंका दिया. लोगों चौकेंगे क्यों नहीं जब आंख बंद करके खतरनाक स्टंट मंच पर होंगे. गतका की इस टीम में 5 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक के खिलाड़ी साहस का परिचय देते हैं.
एक खिलाड़ी के मुंह को कपड़े से बांध दिया जाता है, जिसके भीतर नुकीले कांच होते हैं और उसके बाद उस पर लोहे की रॉड से मारकर और वजनी बर्फ की सिल्ली रखी जाती है और उसके सिर के नीचे नुकीली कीलों वाला तख्त होता है. इतना खतरनाक स्टंट करने के बाद भी खिलाड़ी उठ खड़ा होकर “वाहेगुरु जी द खालसा, वाहेगुरु जी दी फतेह” बोलता है, तो साहस देख पूरा मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज पड़ता है.
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Tags: Dehradun news, Uttrakhand
FIRST PUBLISHED : January 18, 2023, 07:09 IST









