हिमांशु जोशी
पिथौरागढ़. प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत पहाड़ों में होने वाले लोकल उत्पादों को अब स्कूलों में बनने वाले मिड डे मील में शामिल किया जाना है, जिससे लोकल उत्पादों को बढ़ावा मिल सके. जिसके तहत पिथौरागढ़ जिले में तैनात सभी भोजन माताओं की एक पाक कला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें सभी ब्लॉकों की भोजन माताओं ने प्रतिभाग किया. सभी भोजन माताओं द्वारा पहाड़ के अलग अलग पारंपरिक व्यंजन बनाए गए, जिसमें मूनाकोट ब्लॉक की कौशल्या देवी ने प्रथम स्थान हासिल किया. उन्होंने मशरूम की पकौड़ी और झिंगोरे की खीर से सभी को प्रभावित कर अपनी जगह बनाई और यह भी दिखाया कि खाना परोसने के लिए भी मालू के पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो यहां के लोग सदियों से करते आये हैं.
इस प्रतियोगिता में पहाड़ के पारंपरिक व्यंजन देखने को मिले, जिसमें मड़वा, झिंगोरा, झोली, भांग की चटनी, भट्ट के डुबके, नमकीन चाय आदि कई चीजें ऐसे देखने को मिली, जो आजकल काफी कम ही लोग जानते हैं. यह पकवान बेहद स्वादिष्ट होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक है, जिनका इस्तेमाल सदियों से पहाड़ के लोग करते आये हैं.
गंगोलीहाट से आई भोजन माता तुलसी देवी ने कहा कि उन्हें इस प्रतियोगिता में आकर काफी कुछ सीखने को मिला. इस तरह की पहल हमें प्रोत्साहित करती है.
इस प्रतियोगिता का उद्देश्य पहाड़ों में होने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ भोजन माताओं को भी प्रोत्साहित करना है, जो सिर्फ 3000 रुपये के मानदेय पर कार्य कर रही हैं. अगर मिड डे मील में पहाड़ के लोकल उत्पादों से बने व्यंजन शामिल होते हैं, तो इससे निश्चित ही ग्रामीण इलाको के किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही बच्चों को भी पौष्टिक आहार मिल पाएगा. पिथौरागढ़ के शिक्षा अधिकारी माध्यमिक हवलदार प्रसाद ने जानकारी देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य भोजन माताओं को प्रोत्साहित करने और लोकल उत्पादों को बढ़ावा देना है.
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Tags: Pithoragarh news, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : February 16, 2023, 16:29 IST
