ब्यूरो/नवज्योति,जयपुर। विधानसभा चुनाव 2008 में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में महिपाल मदेरणा जलदाय मंत्री थे। मदेरणा भंवरी देवी हत्याकांड प्रकरण के चलते 2013 में कांग्रेस उम्मीदवार घोषित नहीं हो पाए। विधानसभा चुनाव 2013 में जब भाजपा की वसुंधरा सरकार आई तो सुरेन्द्र गोयल जलदाय मंत्री बने। गोयल भी पाली में एक घटना को लेकर भाजपा में टिकट से वंचित रह गए। इस कडी में डॉ.महेश जोशी का नाम जुड गया है। वर्तमान गहलोत सरकार में जलदाय मंत्री डॉ.महेश जोशी 25 सितम्बर घटनाक्रम में पर्यवेक्षक बैठक बहिष्कार मामले में घिर गए और जोशी को हवामहल विधानसभा से अपनी टिकट गंवानी पड़ी।
परिवहन मंत्रियों को लेकर भी दिखा ऐसा संयोग
परिवहन मंत्रियों को लेकर भी ऐसे संयोग बने हैं कि परिवहन मंत्री अगला चुनाव हारे है। वर्ष 1993 में भाजपा सरकार में बानसूर विधायक रोहिताश शर्मा परिवहन मंत्री बने और 1998 में चुनाव हार गए। वर्ष 1998 में कांग्रेस सरकार में छोगाराम बाकोलिया और बनवारीलाल बैरवा परिवहन मंत्री बने और अगला चुनाव हार गए। वर्ष 2003 में भाजपा सरकार में यूनूस खान परिवहन मंत्री बने और 2008 में डीडवाना से चुनाव हार गए। वर्ष 2008 में कांग्रेस सरकार में हवामहल विधायक बृजकिशोर शर्मा और वीरेन्द्र बेनीवाल परिवहन मंत्री बने और 2013 में चुनाव हार गए। वर्ष 2013 में भाजपा सरकार में यूनूस खान फिर से परिवहन मंत्री बने और 2018 में चुनाव हार गए। इस बार गहलोत सरकार में परिवहन मंत्री बृजेन्द्र ओला है और झुंझुनू से चुनाव लड़ रहे हैं। लोगों को इस मिथक को लेकर इंतजार बना हुआ है।
शिक्षा मंत्री बने नेताओं के साथ भी अजब संयोग
शिक्षा विभाग के मंत्री बने नेताओं को लेकर भी राजस्थान में अजीब सा संयोग रहा है। पिछले चार चुनाव में नौ शिक्षा मंत्री बने। इनमें कांग्रेस के बने तीन शिक्षा मंत्री अगला चुनाव हारे और भाजपा के चार शिक्षा मंत्री चुनाव जीते। कुछ को विवादों के चलते पदों से हटाया। कांग्रेस नेताओं में बीडी कल्ला, बृजकिशोर शर्मा और नसीम अख्तर के नाम इसमें शामिल आते हैं। कांग्रेस के नेता मा.भंवरलाल मेघवाल को विवादों के कारण पद खोना पडा और अब्दुल अजीज का शिक्षा राज्यमंत्री रहने के बाद टिकट कटा था। भाजपा नेताओं में शिक्षा मंत्री रहे गुलाबचंद कटारिया, घनश्याम तिवाड़ी, कालीचरण सराफ, वासुदेव देवानी के नाम शामिल हैं।
खेल मंत्रियों के साथ ही अजब संयोग
राजस्थान में पिछले चार चुनावों में खेल मंत्रियों को हार मिली है। वर्ष 1998 में गहलोत सरकार में खेल मंत्री बने मा.भंवरलाल मेघवाल को अगले चुनाव में हार देखनी पड़ी। वर्ष 2003 में वसुंधरा सरकार में दो खेल मंत्री बने और दोनों को हार नसीब हुई। यूनूस खान 2003 में खेल मंत्री बने, हालांकि वो पूरे पांच साल खेल मंत्री नहीं रहे, उनके बाद प्रताप सिंह सिंघवी खेल मंत्री बने लेकिन 2008 में दोनों को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के मांगीलाल गरासिया 2008 में प्रदेश के खेल मंत्री बने और 2013 में हार मिली। कांग्रेस नेता अश्क अली टाक 1985 में फतेहपुर से विधायक बनकर खेल मंत्री बने और अगला चुनाव हार गए। भाजपा सरकार में गजेन्द्र सिंह खींवसर के साथ भी यह मिथक नजर आया। इस बार खेल मंत्री अशोक चांदना है।
