कोटा। किताबें, अगर माने तो इंसान के जीवन की सबसे बड़ी साथी हैं जो हमें सही गलत से लेकर इतिहास तक की जानकारी देती हैं। बचपन में स्कूल से लेकर जवानी में कॉलेज तक फिर वृद्धावस्था में भगवान की भक्ति तक किताबें हमारे जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होती हैं। चाहे पुरानी हो या नई हर किताब में एक कहानी छुपी होती है जो हमारे सामने कई प्रश्नों के उत्तर रखने के साथ कई सवाल खड़ा करती हैं। किताबें बातें करती हैं आज की कल की, खुशियों की दुखों की और जीत की हार की और कोटा में आर्य समाज रोड पर इन्हीं किताबों को छोटा सा बाजार है जहां आपको साहित्य से लेकर भारतीय लोक सेवा अयोग की परीक्षा की तैयारी की किताबें आसानी से मिल जाएंगी। यहां आप किताबें खरीद भी सकते हैं और किताबें बेच भी सकते हैं।
रोज बिकती हैं हजारों किताबें
इस किताबों के बाजार में दुकान लगाने वाले मोहम्मद फरीद कहते हैं कि इस बाजार में हर रोज करीब 1000 किताबें बिक जाती हैं। इन किताबों में सबसे अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में काम आने वाली होती उसके बाद साहित्य की किताबें बिकती हैं। लोग दूर दूर से यहां किताबें लेने आते हैं आपको कभी भी किसी भी जरूरत हो और यहां मौजूद ना हो तो बोल जाइए वो किताब आपको अगले दिन ही मिल जाएगी। फरीद ने आगे बताया कि इस मार्केट में छोटी बड़ी मिलाकर किताबों की करीब 20 दुकानें हैं और लगभग हर दुकान में हजारों किताबें मौजूद हैं। बाजार में प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा साहित्य, राजनीति, अर्थव्यवस्था और इतिहास से जुड़ी कई किताबे मिल जाएगी जो भारत ही नहीं दूनिया का भी एक अलग पक्ष बताती हैं।
करीब 50 साल पुराना बाजार
एक बुक डिपो के मालिक जितेन्द्र सैनी ने बताया कि ये बाजार करीब 50 साल पुराना है और शुरूआत में यहां सिर्फ 2 ही दुकाने हुआ करती थी। उस जमाने में अधिकतर किताबें पुरानी ही बिका करती थी, क्योंकि नई किताबें मंहगी हुआ करती थी और किताबें पढ़ने का शौक भी कोटा में चुनिंदा लोगों का था। लेकिन समय के साथ लोगों के किताबें पढ़ने का चलन भी बढ़ता चला गया और बढ़ती प्रतियोगिता प्ररीक्षाओं के चलते पाठकों की संख्या भी बढ़ती गई और आज यहां करीब 20 दुकाने हैं। सैनी आगे बताते हैं कि उनके परिवार की वो तीसरी पीढ़ी हैं जो किताबों की दुकान चला रही है। कई ऐसे मौके भी आए जब कोई किताब कोटा में कहीं नहीं मिल रही हो और पाठक को यहां मिल जाती है।
जब भी आया किताब मिली
सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे राजकुमार वर्मा ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा यहां इतिहास और साहित्य से जुड़ी किताबें भी यहां मिल जाती हैं। दूसरी ओर यूपीएससी की तैयारी करने वाली मेघा सारास्वत ने बताया कि वो पहले जयपुर में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रही थी लेकिन अभी वापस कोटा आ गई हैं। जयपुर में तो यूपीएससी से जुड़ी सारी किताबें मिल जाती हैं लेकिन कोटा में दिक्कत आती है जब यहां के बारे में पता चला तो फिर यहीं से सारी किताबें ले जाती हूं और यहां पूरानी किताबें भी ली जाती हैं तो अच्छा रहता है।
