ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। प्रदेश के राज बदलने के साथ ही पिछली सरकार की ओर से आखिरी छह माह में लिए गए फैसलों की समीक्षा करने का रिवाज इस बार भी कायम रहने वाला है। इस रिवाज को ध्यान में रखते हुए भाजपा सरकार के सत्ता संभालने के साथ ही संबंधित महकमों ने उन फैसलों को खंगालना शुरू कर दिया है, जो अशोक गहलोत सरकार के आखिरी छह माह में लिए गए थे। अधिकारिक सूत्रों की माने तो 800 से अधिक ऐसे फैसले ऐसे है, जो आखिरी छह माह में लिए गए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की टीम का गठन होना शेष है। मंत्रिमंडल बनने के इस इसके लिए वरिष्ठ मंत्रियों की एक कमेटी गठित होने की संभावना है, जो विभिन्न महकमों से जुडेÞ फैसलों को रिव्यू करेगी। इसमें ज्यादातर मामले, नगरीय विकास विभाग, खान एवं पेट्रोलियम, चिकित्सा, राजस्व से जुडेÞ शामिल है।
एनवक्त के कई फैसले अटके
पूर्ववर्ती सरकार ने कुछ फैसले ऐसे भी लिए जो चुनावों की आचार संहिता लगने से ठीक पहले कैबिनेट में लिए, लेकिन अगले कुछ दिन में ही चुनावों की आदर्श आचार संहिता लगने के कारण उन फैसलों की क्रियान्विति नहीं हो सकी। कई फैसले तो ऐसे थे, जिनकी कैबिनेट आज्ञा ही जारी नहीं हो सकी थी।
ये फैसले रिव्यू के दायरे में
300 से अधिक भू-आवटन के निर्णय, जिनमें सस्ती दरों पर संस्थाओं को विभिन्न शहरों में जमीन दी।
19 जिलों के गठन को मंजूरी, जिसकी उपयोगिता की समीक्षा।
आरएलडी स्किल यूनिवर्सिटी का नाम बदलना।
नए शिक्षण संस्थाओं का गठन।
हिंदी मीडियम स्कूलों को खत्म कर इंग्लिश मीडियम में बदलना।
ड्रग एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को राजकीय उपक्रम बनाना।
अन्नपूर्णा फूड पैकेट वितरण।
महिलाओं को मोबाइल वितरण।
10528 संविदा कर्मियों को नियमित करना।
राजस्व विभाग से जमीन के आवंटन।
चिकित्सा विभाग के फैसलों की उपयोगिता।
विकास परियोजनाओं से जुडेÞ टेंडरों की उपयोगिता की समीक्षा।
विभिन्न कंपनियों को कस्टमाइज्ड पैकेट।
विभिन्न समाजों के 40 से
अधिक बोर्ड का गठन।
