गर्मियों में घूमने के लिए बेस्ट है घने जंगलों के बीच स्थित यह ताल, यहां स्नान के लिए आते थे इंद्र!


सोनिया मिश्रा/ रुद्रप्रयाग.धार्मिक तीर्थाटन हों या पर्यटन स्थल, आज उत्तराखंड ने दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग साख बना ली है. बेहतरीन ट्रेक, प्राचीन मठ-मंदिर और प्रकृति के सुंदर नजारों को अनुभव करने के लिए देश-विदेश से हर साल लाखों सैलानी उत्तराखंड पहुंच रहे हैं. हिमालय की विहंगम वादियों में स्थित रुद्रप्रयाग जिले का देवरिया ताल भी सैलानियों को खूब आकर्षित कर रहा है. यही कारण है कि गर्मियों के दिनों में यहां ट्रेकिंग करने वालों की भीड़ लगातार बढ़ रही है.

रुद्रप्रयाग जनपद में देवरिया ताल एक सुंदर पर्यटक स्थल है, जो जिला मुख्यालय से करीब 49 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. समुद्र तल से 2438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील चोपता ऊखीमठ सारी नामक गांव से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. हरे-भरे जंगलों से घिरी हुई यह एक बेहद आकर्षक और अद्भुत झील है. इस झील के पानी में गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ, नीलकंठ की चोटियों के साथ साथ चौखंबा की श्रेणियां की साफ छवि दिखाई देती है. यह झील दूरदराज से आने वाले यात्रियों को नौका विहार और प्राकृतिक सुंदरता को निहारने का अवसर देती है.

पांडवों से जुड़ी है देवरिया ताल की मान्यता

स्थानीय निवासी आलोक भट्ट लोकल 18 को बताते हैं कि देवरिया ताल की मान्यता पांडवों से जुड़ी हुई है. मान्यताओं के अनुसार, यक्ष जिसने पांडवों से उनके वनवास काल के दौरान सवाल किए थे और जो पृथ्वी में छिपे हुए प्राकृतिक खजानों और वृक्षों की जड़ों का रखवाला है, इसी झील में रहता था. वहीं एक दूसरी मान्यता के अनुसार, देवता इस झील में स्नान करते थे और पुराणों में इसे इंद्र सरोवर के नाम से भी उल्लेखित किया गया है, क्योंकि देवताओं के राजा इंद्र इस स्थान पर स्नान के लिए आते थे.

धूमधाम से मनाई जाती है जन्माष्टमी

प्रसिद्ध पर्यटक स्थल देवरिया ताल में जन्माष्टमी के मौके पर हर साल भव्य देवरिया ताल महोत्सव मनाया जाता है. मेले में भूतनाथ मंदिर सारी, नागराजा मंदिर गेड मनसूना और ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ क्षेत्र से भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां आकर्षण का केन्द्र होती हैं. साथ ही महिला मंगल दल और स्कूली छात्रों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं.

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