उत्तराखंड में इस जगह स्कूल खाली कर मंदिर में पढ़ रहे हैं छात्र, जानें क्यों


कमल पिमोली/टिहरी गढ़वाल: शिक्षा जरूरी है. कितनी जरूरी है, यह बात धीरे-धीरे ही सही लोगों को समझ आ गई है. एजुकेशन ही तो है, जिसकी मदद से आप फर्श से अर्श तक का सफर तय कर सकते हैं. भारत के हर राज्य में आपको अलग-अलग मीडियम के ढेर सारे स्कूल्स दिख जाएंगे. एशिया का सबसे बड़ा स्कूल भी हमारे ही देश में है. लेकिन उत्तराखंड में आज भी एक ऐसी जगह है, जहां बच्चे स्कूल की जगह मंदिर में पढ़ाई कर रहे हैं. आइए जानते हैं बच्चे ऐसा करने के लिए मजबूर क्यों है.

मंदिर में पढ़ रहे हैं बच्चे
उत्तराखंड के नागराजा में एक खास मंदिर है, जिसके परिसर में बच्चे पढ़ते हैं. सुनहरे भविष्य की आशा के साथ इन बच्चों का स्कूल यहीं से चलता है. इसके पीछे का कारण है स्कूल का भवन, जिसकी हालत जर्जर हो चुकी है. छत गिरने का भय है. दरअसल, उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित भिलंगना ब्लॉक में एक स्कूल की हालत खराब हो गई है. इसी वजह से बच्चों को पढ़ाई के लिए मंदिर जाना पढ़ रहा है.

मूलभूत शिक्षा के लिए जूझ रहे स्टूडेंट्स
भले ही डिजीटल स्कूल स्मार्ट क्लास वाले स्कूलों की खबरें आपको पढ़ने को दिखती हो. लेकिन पहाड़ों के शिक्षक और स्टूडेंट्स आज भी  मूलभूत आवश्यकताओं से जूझ रहे हैं. कई जगह शिक्षक हैं, तो स्टूडेंट्स नहीं है. जहां छात्र हैं तो वहां पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं है. वहीं कुछ जगह दोनों है तो भवन खस्ताहाल हो चुका है.

स्कूल में पढ़ने से लगता है डर!
प्राथमिक विद्यालय सिलुड़ी बासर के हालत इतने खस्ताहाल है कि बच्चों को मजबूरन कड़ी धूप और बारिश में नागराजा मंदिर के बाहर बैठना पड़ रहा है. छात्रों का कहना है, ‘हमें खस्ताहाल हो चुके स्कूल में पढ़ने से डर लगता है जिस कारण हम अपनी पढ़ाई नागराजा मंदिर के बाहर कर रहे हैं.’बच्चों ने बताया कि उनके स्कूल में डिजिटल स्क्रीन से लेकर बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था भी है, लेकिन छत के गिरने के डर से वो मंदिर में पढ़ाई कर रहे हैं. गांव के लोगों का भी कहना है कि उन्हें जर्जर हो चुके स्कूल की बिल्डिंग में अपने बच्चों को भेजने से डर लगता है.

अभी तक नहीं बन पाया नया भवन
स्कूल की टीचर तेजा सिंह कोहली ने कहा, ‘विद्यालय का निर्माण 2001 में हुआ था. जबकि 2018 से विद्यालय की स्थिति जर्जर बनी हुई है. भवन के संबंध में एसएमसी द्वारा तीन बार खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है. साथ ही 32 लाख का एस्टीमेट भी बनकर तैयार हो चुका है. लेकिन अभी तक शासन की तरफ से इस ओर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई.’ जानकारी देते हुए बताते हैं कि स्कूल भवन में कमरे और बरामदा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रखा है. साथ ही दिवारों, छतों पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं.

कहां है ये मंदिर?
नागराजा मंदिर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में बना है. यहां के लोग इस मंदिर में रोजाना पूजा-पाठ करने के लिए पहुंचते हैं.

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