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Nainital News : नैनीताल में बलियानाला क्षेत्र के भूमिगत जल का उपयोग कर जल संकट का समाधान किया जाएगा. इस परियोजना से 7,000 लोगों को राहत मिलेगी और भू-स्खलन की समस्या भी कम होगी. 2 करोड़ की लागत से बोरिंग का काम …और पढ़ें
बलियानले के भूमिगत जल को पेयजल के लिए सप्लाई करने की योजना है
हाइलाइट्स
- बलियानाला के भूमिगत जल से नैनीताल की जल समस्या हल होगी.
- 2 करोड़ की लागत से बोरिंग का काम जल्द शुरू होगा.
- परियोजना से भू-स्खलन और जल संकट दोनों पर नियंत्रण मिलेगा.
नैनीताल. गर्मियों की शुरुआत से पहले ही नैनीताल में पानी की समस्या शुरू हो गई है. हालांकि नैनीताल में पानी की समस्या से परेशान शहरवासियों के लिए राहत की खबर है. बलियानाला क्षेत्र में भूमिगत जल की अधिक मात्रा में होने के कारण, प्रशासन ने इसका उपयोग करने की योजना बनाई है. इस पहल से न केवल जल संकट का समाधान होगा, बल्कि पहाड़ी कटान की समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा.
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ब्रिजेन्द्र सिंह ने बताया कि बलियानाला क्षेत्र में ट्रीटमेंट का कामजारी है. इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से भू-स्खलन और पानी के रिसाव की घटनाएं हो रही हैं. भूगर्भीय सर्वेक्षण में पाया गया कि जीआईसी स्कूल के खेल मैदान की तलहटी में करीब 20 मीटर गहराई में भूमिगत जल है. यहां से ही लगातार पानी का रिसाव हो रहा है. प्रशासन अब इस पानी को बोरिंग के माध्यम से निकालकर शुद्ध करेगा और इसे पेयजल आपूर्ति के लिए उपयोग करेगा.
हजारों लोगों को मिलेगी राहत
हर साल गर्मियों में नैनीताल के विभिन्न इलाकों में जल संकट बढ़ जाता है. नैनीझील का जलस्तर भी धीरे-धीरे घट रहा है, जिससे भविष्य में पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है. लेकिन बलियानाला बोरिंग प्रोजेक्ट से नैनीताल के तल्लीताल क्षेत्र की करीब 7,000 की आबादी को राहत मिलेगी. इससे झील पर जल आपूर्ति की निर्भरता कम होगी और प्राकृतिक जल स्रोतों को भी संरक्षित करने में मदद मिलेगी.
2 करोड़ की लागत से होगा बोरिंग का काम
इस योजना के लिए 2 करोड़ का बजट है. जिसमें से 50 लाख रुपए सिंचाई विभाग जल संस्थान को दे चुका है. विभाग की मानें तो जल्द ही इस परियोजना का कार्य शुरू कर दिया जाएगा. बोरिंग का काम सिंचाई विभाग की देखरेख में जल संस्थान द्वारा किया जाएगा.
एक साथ कई दिक्कतों का होगा समाधान
यह परियोजना केवल पानी की समस्या को हल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बलियानाला क्षेत्र की पहाड़ी का संरक्षण भी संभव होगा. लगातार हो रहे भू-स्खलन पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत बलियानाला के पानी को नियंत्रित कर इसका सही उपयोग किया जाएगा, जिससे नैनीताल के जल संकट में कमी आएगी. अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में नैनीताल के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के प्रयास किए जा सकते हैं.
