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Breast Cancer Awareness Month : हर साल अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है, और इसी कड़ी में आशा शर्मा नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में ‘पिंक रैली’ का आयोजन करती हैं. इस रैली के जरिए महिलाओं को इन खतरनाक बीमारियों से बचाव और शुरुआती पहचान के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है. 

नैनीताल. उत्तराखंड की ‘सरोवर नगरी’ नैनीताल न सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती है, बल्कि यहां की एक महिला समाज सेवा के क्षेत्र में एक अनोखी मिसाल पेश कर रही हैं. ये हैं नैनीताल निवासी आशा शर्मा, जिन्हें आज लोग ‘पिंक लेडी’ के नाम से पहचानते हैं. आशा शर्मा ने महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाने की ठानी और इसके लिए उन्होंने ‘आशा फाउंडेशन’ की स्थापना की.

गौरतलब है कि हर साल अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है, और इसी कड़ी में आशा शर्मा नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में ‘पिंक रैली’ का आयोजन करती हैं. इस रैली के जरिए महिलाओं को इन खतरनाक बीमारियों से बचाव और शुरुआती पहचान के महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है. आज उनकी इस मुहिम का असर यह है कि सैकड़ों महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हो रही हैं.

2019 में शुरू की थी पिंक मुहिम
आशा शर्मा का फाउंडेशन सिर्फ कैंसर जागरूकता तक सीमित नहीं है. यह बालिका शिक्षा, नशे के दुष्प्रभाव, और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर भी काम करता है. लेकिन उनकी सबसे खास पहचान बनी है उनकी ‘पिंक मुहिम’, जिसे उन्होंने साल 2019 में शुरू किया था. उनकी लगन और समाज सेवा के लिए उन्हें ‘सुषमा स्वराज स्त्री शक्ति सम्मान’ और ‘हिमालय नारी शक्ति सम्मान’ जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं.

खुद के खर्च पर चला रहीं मुहिम
आशा शर्मा अपने इस फाउंडेशन को किसी बाहरी फंडिंग के बिना चला रही हैं. वह खुद के खर्च से स्कूलों और ग्रामीण इलाकों में जाकर महिलाओं को रीयूजेबल सेनेटरी पैड्स बांटती हैं. और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देती हैं. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अभी भी इस विषय पर खुलकर बात नहीं कर पातीं, इसलिए वह गांव-गांव जाकर उन्हें जागरूक करती हैं.

इस कारण पड़ी बदलाव की नींव 
इस मुहिम की शुरुआत के पीछे भी एक भावनात्मक वजह रही है. साल 2011 में आशा शर्मा को एक बीमारी के चलते गर्भाशय निकलवाना पड़ा, और 2014 में ब्रेस्ट सर्जरी करानी पड़ी. उसी अनुभव ने उन्हें यह एहसास कराया कि जागरूकता की कमी किस तरह महिलाओं के जीवन को प्रभावित करती है. तभी से उन्होंने तय किया कि वह अन्य महिलाओं को इस अंधेरे से बाहर निकालेंगी. अब तक आशा शर्मा 40 से अधिक ग्रामीण इलाकों में 4000 से ज्यादा महिलाओं को कैंसर के प्रति जागरूक कर चुकी हैं. उनका फाउंडेशन ‘पेलेटिव केयर’ (Palliative Care) के तहत लास्ट स्टेज कैंसर मरीजों की भी हर संभव मदद करता है. आशा शर्मा आज समाज में एक प्रेरणा की मिशाल पेश कर रहीं हैं

मृत्‍युंजय बघेल

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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Breast Cancer : जागरूकता की मिसाल हैं नैनीताल की ‘पिंक लेडी’…

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