Chamoli News : 2020 में पहाड़ी संग्रहालय का निर्माण , महज 3 वर्षों में हुआ बदहाल , जानिए वजह


रिपोर्ट : सोनिया मिश्रा

चमोली/गोपेश्वर.उत्तराखंड में वैसे तो घूमने के शौकीनों के लिए कई जगह है, लेकिन पहाड़ी संस्कृति, वेशभूषा इत्यादि को समझने के लिए एक ही जगह में उनका कलेक्शन आपको बेहद ही कम मिलेगा. आज इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे, जहां आपको सदियों पुरानी परंपरागत पहाड़ी आभूषण, पुरानी प्रचलित मुद्राएं, बर्तन आदि की झलक देखने को मिलेगी. चमोली के जिला मुख्यालय गोपेश्वर के कलेक्ट्रेट परिसर में पहाड़ी संग्रहालय का निर्माण 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया द्वारा करवाया गया था. यहां प्राचीन मुद्राओं ,होमस्टे का मॉडल, भोटिया जनजाति के परिधान, पहाड़ी आभूषण, पुराने रेडियो, काष्ठ कला से निर्मित हुड़के इत्यादि को शामिल किया गया है.

पहाड़ी संग्रहालय में संजो कर रखी गई ये सारी चीजें पूर्व में जिला कार्यालय के मालखाने में रखी गई थीं, जहां रख-रखाव के अभाव में यह खराब हो रही थीं. तत्कालीन डीएम ने जब मालखाने का निरीक्षण किया, तो उस दौरान यहां पड़ी यह सामग्री देखकर उनका संग्रह करने का विचार किया. ऐसे में उन्होंने तत्काल विभाग को कलेक्ट्रेट परिसर में संग्रहालय का निर्माण कर यह सभी आभूषण और वस्तुएं इसमें में सजाने के निर्देश दिया था . वहीं, पहाड़ी हस्तशिल्प की तर्ज पर संग्रहालय भवन का भी निर्माण किया गया है.

आकर्षण का केंद बन गया था पहाड़ी संग्रहालय
पहाड़ी संग्रहालय में आपको विभिन्न प्रकार के आभूषण जैसे पैरों के लिए पायल ‘झंवरी’, ‘मूर्खली’ (कान में पहने जाने वाला आभूषण), ‘चंद्रारौली’, कमर में पहने जाने वाला आभूषण, ‘धागुली’ कलाई में पहने जाने वाला आभूषण, भोटिया परिधान (घाघरा, ग्लोबंद, अंगड़ी,घुंघुटी), देखने को मिलेंगे. इसके अलावा संग्रहालय में रिंगाल से निर्मित पहाड़ी वाद्य यन्त्र हुड़का, लैंप, लालटेन भी दिख जाएगी. साथ ही साथ देवपूजन में प्रयोग आने वाला ‘भांकुरा’ (बजाए जाना वाला वाद्य यंत्र) और ‘पीतल का खपर’, पुरातन कालीन पीतल के बर्तन, तराजू, ब्रिटिश कालीन स्टाम्प पेपर, पुरातन कालीन घड़ियां, भारतीय पत्र मुद्रा, सिक्के देखने को मिलेंगे. साथ ही पहाड़ों में छाछ बनाने के लिए एक विशेष प्रकार के लकड़ी से निर्मित बर्तन का प्रयोग किया जाता है, जिसे ‘परया’ कहा जाता है. उस बर्तन में दही डालकर मथा जाता है. यह भी संग्रहालय में देखने को मिल जायेगा.

चंद दिनों मे हुआ बदहाल
वरिष्ठ पत्रकार जगदीश पोखरियाल बताते है कि जब शुरू में पहाड़ी संग्रहालय का निर्माण किया गया था, तो उसका अच्छे से रखरखाव प्रशासन द्वारा किया गया था और दूरदराज के स्कूलों के छात्र पहाड़ी कलेक्शन को देखने के लिए स्कूल टूर पर यहां आते थे. लेकिन वर्तमान समय में संग्रहालय में रंग-रोगन न होने की वजह से यहां की सुंदरता फीकी सी लग रही है.

स्थिति में किया जाएगा सुधार
चमोली के सीडीओ ललित नारायण मिश्र में बताया कि पहाड़ी संग्रहालय का निर्माण पहाड़ की संस्कृति, इतिहास, विरासत को समझने के लिए किया गया.छात्र और पर्यटक यहां पर आते रहते है और वे अपनी जानकारी में बढ़ोतरी करते है. साथ ही उन्होंने बताया कि पहाड़ी संग्रहालय में जहां पर भी सुधार की आवश्यकता होगी, निश्चित रूप से किया जाएगा.

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