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Unveiling the Ramman Festival: A Cultural Treasure of Uttarakhand
Ramman Sacred Festival and Ritual Theater of the Garhwal Himalayas Ramman Mahotsav is an annual festival of Chamoli Dist , Uttarakhand, a testament to the rich cultural heritage of Dev Bhoomi Uttarakhand. Ramman is organized every year in the month or April i.e. Baisakhi is organized in Sallud village near Joshimath in Chamoli district . The event lasts for five days and highlights the dedication, music, and dance of the region. It involves reenactments of scenes from the Ramayana with great passion and energy. It is said that the Ramman festival is celebrated here from a very old time for ... Read more
पहाड़ की बेटी के पहाड़ से हौसले! गुरू के कहने पर उठाया कदम, जानें कैसे ‘ढोल गर्ल’ बनीं वर्षा बंडवाल
सोनिया मिश्रा/चमोली. देवभूमि उत्तराखंड में कई प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्होंने कई सामाजिक वर्जना को तोड़ कर नई कहानी का अध्याय शुरू किया है. उन्हीं में से एक हैं वर्षा बंडवाल, जिन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन में रहकर ढोल सीखना शुरू किया और आज पुरुषों पर ढोल के एकाधिकार को खत्म कर वह तमाम महिलाओं के लिए मिसाल बन गईं. साथ ही आज उन्होंने अपनी पहचान ‘ढोल गर्ल’ के रूप में बनाई है. चमोली जिले के पीपलकोटी गडोरा गांव की रहने वालीं वर्षा बंडवाल के ढोल बजाने की कला हर किसी को मंत्र मुग्ध कर देती है. ढोल पर वर्षा की ... Read more
500 साल पुराना है रम्माण नृत्य…18 तालों में पूरी होती है रामायण, जानें क्या है ‘मुखौटा नृत्य’
सोनिया मिश्रा//चमोली. देवभूमि उत्तराखंड ने सदियों से लोक संस्कृति, लोककलाओं, लोकगाथाओं को संजोकर रखा है और यही बात इसे दूसरों से अलग बनाती है. ऐसी ही एक लोक संस्कृति है रम्माण, जिसने देवभूमि के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र से विश्व सांस्कृतिक धरोहर में अपना स्थान बनाया है. साथ ही जिसने आज भी अपने 500 वर्षों के इतिहास को संजोकर रखा है. चमोली जिले के दूरस्थ विकासखंड जोशीमठ में प्रत्येक वर्ष रम्माण उत्सव का धूमधाम से आयोजित किया जाता है. इसमें रामायण से संबंधित विभिन्न विधाओं की ढोल दमाऊ की 18 तालों में प्रस्तुति की जाती है. इसे ‘मुखौटा नृत्य’ भी ... Read more
Chamoli News: मुश्किल हालातों में भी नहीं मानी हार, जानिए कौन हैं ‘गोल्डन गर्ल’ मानसी नेगी?
सोनिया मिश्रा/ चमोली. उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली के युवाओं में टैलेंट की कमी नहीं है. जनपद के कई युवा राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में पूरे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उन्हीं में से एक है गोल्डन गर्ल मानसी नेगी (Mansi Negi Walk Race). बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली मानसी चमोली के मजोठी गांव की है. उनका जन्म 3 मई 2003 को हुआ था. मानसी के पिता का नाम लखपत सिंह और मां का नाम शकुंतला देवी है. घर की पारिवारिक स्थिति ठीक न होने की वजह से परिवार की अन्य महिलाओं ... Read more
आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए युवाओं ने मिलकर बनाया LDRF ग्रुप, जानें कैसे काम करता है यह संगठन?
सोनिया मिश्रा/चमोली.उत्तराखंड के लोगों का आपदाओं से चोली दामन का साथ है. जहां एक ओर यहां के मैदानी इलाकों में लगातार जल भराव की समस्या देखी जाती है. वहीं पहाड़ी जिलों में भूकंप, भूस्खलन, दवाग्नि, भू-क्षरण, भू-धंसाव जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं से यहां के लोग जूझते रहते हैं. जिससे बड़ी मात्रा में जान-माल की हानि होती है. इसका जीता जागता उदाहरण 2013 की केदारनाथ आपदा है. सिर्फ इतना ही नहीं इसी तरह की कई आपदाओं के लिए पहाड़ पूरी देश दुनिया में कुख्यात हैं. प्राकृतिक आपदाओं की समस्या को देखते हुए चमोली जिले के युवाओं ने मिलकर एक संगठन का ... Read more
चमोली जिले के गणाई में शिक्षक को दी विदाई, पूरा गांव रोया फुट फुट कर
सोनिया मिश्रा चमोली/जोशीमठ: उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत वर्ष में प्रत्येक विभागों में ट्रांसफर की प्रक्रिया होती है. इसी प्रकार, शिक्षा विभाग में भी सुगम और दुर्गम का प्रावधान होता है, जिसे सभी अध्यापकों को मानना होता है. वे अपनी सेवाएं अपनी कर्मभूमि में ही देने का प्रयास करते हैं. हालांकि, कुछ अध्यापक अपनी मेहनत, प्यार और ईमानदारी के साथ सभी के दिलों में अपनी एक अलग छवि, पहचान और रिश्ते बना लेते हैं. इसके बाद, जब उनको किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर होने की सूचना मिलती है, तो उनसे जुड़े सभी व्यक्तियों की आंखें उनके जाने से भावुक ... Read more
5 साल से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज गौचर,
सोनिया मिश्रा/चमोली/गौचर.राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना 1979-80 में हुई थी. जो उत्तराखंड के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है. लेकिन लगातार 2018 के बाद से कॉलेज में अध्यापकों की कमी बनी हुई है. जिसको देखते हुए छात्र-छात्राओं ने अब सड़कों पर आकर धरना-प्रदर्शन करना और ज्ञापन देना भी शुरू कर दिया है. बता दें कि वर्तमान समय में राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज गौचर में कुल चार ब्रांच (सिविल, इलेक्ट्रॉनिक, आईटी, फार्मेसी) संचालित किए जा रहें हैं. जिसमें कि प्रत्येक ब्रांच में सिर्फ एक-एक ही अध्यापक तैनात किए गए हैं, जबकि प्रत्येक ब्रांच में तीन-तीन अध्यापकों की तैनाती होनी चाहिए थी. ... Read more
Chamoli News: स्कूल में पढ़ाने के बजाय घर पर सोते मिले नशे में धुत मास्टर जी, ग्रामीणों ने VIDEO बनाया तो हुए सस्पेंड
सोनिया मिश्राचमोली.आजकल सोशल मीडिया का युग है, जहां तरह-तरह की खबरें, जानकारियां, लोग या फिर चौंकाने वाले वीडियो अचानक वायरल हो जाते हैं. कुछ इसी तरह उत्तराखंड के चमोली जिले का एक वीडियो भी इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो को स्कूली बच्चों के माता-पिता बना रहे हैं और वीडियो बनाते हुए वह स्कूल के टीचर के कमरे में चले जाते हैं, जहां गुरुजी कथित तौर पर नशे में धुत होकर आराम फरमा रहे होते हैं. आरोप है कि बच्चों को स्कूल में पढ़ाने के बजाय वह शराब पीकर अपने कमरे में सो रहे थे. ... Read more
Chamoli News : 2020 में पहाड़ी संग्रहालय का निर्माण , महज 3 वर्षों में हुआ बदहाल , जानिए वजह
रिपोर्ट : सोनिया मिश्रा चमोली/गोपेश्वर.उत्तराखंड में वैसे तो घूमने के शौकीनों के लिए कई जगह है, लेकिन पहाड़ी संस्कृति, वेशभूषा इत्यादि को समझने के लिए एक ही जगह में उनका कलेक्शन आपको बेहद ही कम मिलेगा. आज इस रिपोर्ट में हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताएंगे, जहां आपको सदियों पुरानी परंपरागत पहाड़ी आभूषण, पुरानी प्रचलित मुद्राएं, बर्तन आदि की झलक देखने को मिलेगी. चमोली के जिला मुख्यालय गोपेश्वर के कलेक्ट्रेट परिसर में पहाड़ी संग्रहालय का निर्माण 2020 में तत्कालीन जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया द्वारा करवाया गया था. यहां प्राचीन मुद्राओं ,होमस्टे का मॉडल, भोटिया जनजाति के परिधान, ... Read more
Chamoli News: 22 साल से मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे ग्रामीण, सड़क न होने से डंडी-कंडी ही बीमारों का सहारा
रिपोर्ट: सोनिया मिश्रा चमोली. उत्तराखंड बने हुए 22 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन आज भी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की जनता अपनी मूलभूत जरूरतों से कोसों दूर है. उत्तराखंड के सीमांत और सबसे बड़े चमोली जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं, तो यहां स्कूलों में शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर दिखता है. खस्ताहाल सड़कें या फिर गांवों तक सड़कें न बनना अब आम बात हो चुकी है. स्थानीय लोग जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा-लगाकर थक गए हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है. विकासखंड पोखरी के तहत ग्राम ... Read more