आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए युवाओं ने मिलकर बनाया LDRF ग्रुप, जानें कैसे काम करता है यह संगठन?
सोनिया मिश्रा/चमोली.उत्तराखंड के लोगों का आपदाओं से चोली दामन का साथ है. जहां एक ओर यहां के मैदानी इलाकों में लगातार जल भराव की समस्या देखी जाती है. वहीं पहाड़ी जिलों में भूकंप, भूस्खलन, दवाग्नि, भू-क्षरण, भू-धंसाव जैसी कई प्राकृतिक आपदाओं से यहां के लोग जूझते रहते हैं. जिससे बड़ी मात्रा में जान-माल की हानि होती है. इसका जीता जागता उदाहरण 2013 की केदारनाथ आपदा है. सिर्फ इतना ही नहीं इसी तरह की कई आपदाओं के लिए पहाड़ पूरी देश दुनिया में कुख्यात हैं.
प्राकृतिक आपदाओं की समस्या को देखते हुए चमोली जिले के युवाओं ने मिलकर एक संगठन का निर्माण किया है जिसका नाम रखा LDRF यानि लोकल डिजास्टर रिलीफ फोर्स. यह एक ऐसा संगठन है जो निस्वार्थ भाव से आपदाग्रस्त लोगों की मदद के लिए हमेशा ही बढ़ चढ़कर आगे आता है और अपनी भूमिका निभाता है. बता दें कि चमोली करंट हादसे के शिकार हुए लोगों के परिजनों तक पहुंचकर इस ग्रुप राहत देने का काम किया था.
प्रशासन एक सीमा तक ही कर सकता है मदद
टीम के संयोजक अंकोला पुरोहित बताते हैं कि केदारनाथ धाम में आई 2013 की आपदा में ना सिर्फ चमोली जिले ने बल्कि देश के तमाम कोनों से आए लोगों ने आपदा में अपने परिजनों को खोया था. जिसके बाद से हमें यह महसूस हुआ कि शासन-प्रशासन कहीं न कहीं अपनी सीमा तक ही काम कर सकते हैं. जिसे देखते हुए चमोली जिले के युवाओं ने मिलकर जरूरतमंद लोगों की मदद करने के बारे में सोचा और मिलकर एक ग्रुप तैयार किया . जो जिले में आपदा आने पर सभी की मदद के लिए पहुंचे. जिसका नाम सभी को सहमति से LDRF (लोकल डिजास्टर रिलीफ फोर्स) रखा. यह ग्रुप हमेशा ही जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहता है.
एलडीआरएफ में ये लोग है शामिल
वहीं समाजसेवी अंशु रावत बताते हैं कि एलडीआरएफ एक ऐसा संगठन है जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग (नेता, शिक्षक, व्यापारी,पत्रकार) आदि शामिल है. जो समय समय पर आपदाग्रस्त, जरूरतमंद लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान करने में जुट जाता है. साथ ही बताते हैं कि इस ग्रुप के लिए फंडिंग आपसी सहयोग से ही होता है.
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FIRST PUBLISHED : September 10, 2023, 17:37 IST