Chamoli News: 22 साल से मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहे ग्रामीण, सड़क न होने से डंडी-कंडी ही बीमारों का सहारा


रिपोर्ट: सोनिया मिश्रा

चमोली. उत्तराखंड बने हुए 22 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन आज भी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की जनता अपनी मूलभूत जरूरतों से कोसों दूर है. उत्तराखंड के सीमांत और सबसे बड़े चमोली जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं, तो यहां स्कूलों में शिक्षकों की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई पर दिखता है. खस्ताहाल सड़कें या फिर गांवों तक सड़कें न बनना अब आम बात हो चुकी है. स्थानीय लोग जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा-लगाकर थक गए हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है. विकासखंड पोखरी के तहत ग्राम पंचायत सिनाऊ तल्ला मल्ला के ग्रामीण आज भी सड़क मार्ग से वंचित है, जिस वजह से ग्रामीणों को मुख्य बाजार और तहसील मुख्यालय पोखरी तक आवाजाही में परेशानी होती है. अक्सर बीमार बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आए दिन ग्रामीण डंडी-कंडी और डोली द्वारा मरीजों को अस्पताल पहुंचाते दिख जाते हैं.

हाल ही में यहां की रहने वालीं 75 वर्षीय कल्पेश्वरी देवी को ग्रामीणों ने पांच किलोमीटर पैदल चढ़ाई डंडी से पार करवाई. पहले उनको मुख्य उडामांडा सड़क तक और बाद में टैक्सी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी पहुंचाया, जहां उनकी हालत अब ठीक है.

सुनाऊं तल्ला, मल्ला के क्षेत्र पंचायत सदस्य सुभाष रावत और विनगढ़ के पूर्व प्रधान हर्षवर्धन चौहान का कहना है कि लगातार ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक भी उनकी ग्राम सभा को सड़क मार्ग से नहीं जोड़ा गया है. अगर सड़क मार्ग की सुविधा हमें मिल जाती तो ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की दिक्कतों से निजात मिल जाती. साथ ही वह कहते हैं कि आज उत्तराखंड को बने 22 साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन आज भी हमारी सड़क, अस्पताल, शिक्षा की स्थिति ठीक नहीं हो पाई है, जिससे पहाड़ों से सभी पलायन कर रहे हैं.

18 किलोमीटर चलने के लिए मजबूर हैं ग्रामीण
जोशीमठ का डुमक गांव आज भीसड़क से वंचित है. डुमक गांव से 18 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई चढ़कर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल भर्ती करवाने की तस्वीरें आए दिन सामने आती रहती हैं. कुछ समय पूर्व गर्भवती महिला कल्पना देवी को भी डोली बनाकर 18 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया गया था और उसके बाद 15 किलोमीटर पहाड़ी रास्तों से होते हुए जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया.ग्रामीण रामकिशोर और जय भारत कहते हैं कि डुमक गांव आज भी गुलामों की तरह जी रहा है. बद्रीनाथ विधानसभा के विधायक राजेन्द्र भंडारी ने कहा किबद्रीनाथ विधानसभा के अधिकतर गांव सड़क से जुड़ चुके हैं. अब कुछ ही गांव शेष बचे हैं, जहां सड़क पहुंचाना बाकी है. ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए सड़क का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और जैसे ही शासन से सड़क को लेकर वित्तीय स्वीकृति मिलती है, वैसे ही सड़क का निर्माण शुरू हो जाएगा. विभाग के उच्च अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत जारी है.

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