Dehradun: देहरादून के विनय गुप्ता का अनोखा शौक, 11 साल की उम्र से कर रहे हैं डाक टिकट कलेक्शन


रिपोर्ट- हिना आजमी
देहरादून. 
डाक टिकट कलेक्शन करने का कई लोगों का शौक होता है लेकिन देहरादून के विनय गुप्ता 11 साल की उम्र से डाक टिकट कलेक्ट कर रहे हैं. उनके पास हजारों डाक टिकटों का कलेक्शन है, जिनमें इतिहास की ढेरों निशानी हैं. G20 के लिए भी वह हर देश की डाक टिकटों की प्रदर्शनी की प्लानिंग कर रहे हैं. वह युवा फिलेटलिक एसोसिएशन चलाते हैं, जो स्कूलों में जाकर बच्चों को डाक टिकट के बारे में जानकारी देती है.

विनय गुप्ता ने जानकारी दी कि उन्हें 11 साल की उम्र से ही डाक टिकट कलेक्शन करने का शौक था. उन्होंने बताया कि वह जब मसूरी के हॉस्टल में पढ़ रहे थे, तब उस जमाने में मोबाइल फोन नहीं हुआ करते थे. ऐसे में बच्चों के लिए घर परिवार से चिट्ठी और तार ही आया करते थे, जिसमें डाक टिकट इस्तेमाल हुआ करता था. विनय बताते हैं कि उनके साथ दूसरे देशों के बच्चे भी पढ़ा करते थे, जिनकी चिट्ठियों पर उनके देश के डाक टिकट हुआ करते थे. यही उन्हें बहुत अच्छा लगता था. उन्होंने बताया कि यह डाक टिकट अलग-अलग रंग, आकार और अलग-अलग जानकारी के लिए छात्रों में ज्ञान बढ़ाने के लिए लाभदायक होते हैं.

192 देशों से ज्यादा के डाक टिकट
उन्होंने बताया कि साल 2002 में जब वह कक्षा 11 में थे, तब उनके टीचर मिस्टर जैरिमी ने उनको करीब 5000 डाक टिकट का कलेक्शन दिया था. जिसके बाद उनकी रूचि और ज्यादा बढ़ गई. उन्होंने बताया कि उनके पास पूरी दुनिया के करीब 192 देशों से ज्यादा के डाक टिकट हैं. उनके डाक कलेक्शन में स्विट्जरलैंड गवर्नमेंट की ओर से गांधी जी पर जारी किए गए 3D टिकट, दून पर रिलीज हुए स्पेशल कवर, अशोक शिलालेख कालसी, सर जॉर्ज एवरेस्ट, राष्ट्रीय जल संरक्षण संस्थान और नेवी के स्पेशल कवर शामिल हैं.

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छात्रों के लिए बहुत मददगार 
देहरादून के रहने वाले विनय गुप्ता का कहना है कि यह डाक टिकट न सिर्फ हमारे इतिहास को सहेज कर रखने के काम आते हैं बल्कि यह सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं और छात्रों के लिए बहुत मददगार होते हैं क्योंकि इससे सामान्य ज्ञान मजबूत होता है.

हर साल करीब 25000 रुपये के डाक टिकट खरीदते हैं
विनय गुप्ता ने साल 2017 में युवा फिलेटलिक एसोसिएशन बनाई, जिसके माध्यम से वह देहरादून के स्कूलों में जाकर प्रदर्शनी लगाकर छात्र-छात्राओं को डाक टिकट के बारे में जानकारी देते हैं. राजधानी देहरादून के राजभवन और कई बड़े स्थानों पर विनय गुप्ता प्रदर्शनी लगाते हैं और लोगों को पुरानी ऐतिहासिक निशानियों से जोड़ते हैं. विनय गुप्ता डाक टिकट के अपने इस शौक को राजाओं का शौक मानते हैं क्योंकि जिस तरह से राजाओं को पुरानी और अनोखी वस्तुओं को संग्रह करने का शौक था. कुछ वैसे ही डाक टिकट संग्रहकर्ताओं को होता है और इससे बिजनेस कर लोग बहुत पैसा भी कमाते हैं. विनय गुप्ता बताते हैं कि वह हर साल करीब 25000 रुपये के डाक टिकट खरीदते हैं. इससे सरकार कभी रेवेन्यू जनरेट होता है.

G20 के कार्यक्रम में प्रदर्शनी के लिए कर रहे तैयारी
मई में नरेंद्र नगर में G20 के कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें डाक टिकटों की प्रदर्शनी भी लगाने की तैयारी विनय गुप्ता कर रहे हैं. उनका कहना है कि हम इस कार्यक्रम में सभी देशों की डाक टिकट की प्रदर्शनी लगायेंगे, जिससे वहां के कल्चर को भी दर्शाया जा सके.

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