रिपोर्ट- हिना आजमी
देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित गांधी पार्क ब्रिटिश कालीन है, जिससे कई अहम बातें जुड़ी हैं. इसमें न सिर्फ बच्चों के लिए मनोरंजन के साधन हैं बल्कि युवाओं के लिए जिम आदि की सुविधा भी उपलब्ध है. गांधी पार्क शहर के बीचोंबीच स्थित है, इसलिए यहां आने वाले लोगों के लिए यह पार्क हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहता है. इसमें बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क है, जिसमें कई तरह के झूले, ट्रेन आदि मनोरंजन के साधन मौजूद हैं. जबकि आसपास के लोग यहां मॉर्निंग मॉर्निंग वॉक के लिए आते हैं.
गांधी पार्क में इवनिंग वॉक पर आई देहरादून निवासी वंदना ने बताया कि वह अक्सर यहां आती हैं. शहर के प्रदूषण और शोर-शराबे के बीच एकमात्र गांधी पार्क ही शांति और हरियाली के चलते लोगों के आकर्षण का केंद्र है. उन्होंने बताया कि गांधी पार्क पहले इतना विकसित नहीं था. अब सौदर्यीकरण करके इसमें कई पेड़-पौधे, जिम मशीनें और बच्चों के मनोरंजन के साधन बनाये गए हैं. स्थानीय जनता के लिए यह बहुत खास है.
आपके शहर से (देहरादून)
वहीं गर्मियों के मौसम में शहर के स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चे, दफ्तर में काम करने वाले लोग और यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए गांधी पार्क के पेड़ों की छाया और शुद्ध हवा किसी एसी की हवा से बेहतर है. यह पार्क मुख्य बाजार में होने के कारण सबका ध्यान खींचता है. यहां बच्चों के लिए गांधी पार्क के एक सेक्शन में झूले, रेलगाड़ी और कई तरह के साधन बनाए गए हैं, जिसकी फीस 50 रुपये है. कपल, परिवार और दोस्तों के लिए गांधी पार्क बेहतरीन स्थान है. जॉगर्स, फिटनेस पर काम करने वाले लोग भी यहां आते हैं.
गांधी पार्क देहरादून के बीचोंबीच स्थित है, जहां से हर रोज हजारों लोग गुजरते हैं. यही कारण है कि धरना प्रदर्शन या किसी मांग को लेकर लोग महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने बैठते हैं. उत्तराखंड राज्य बनने के एक साल बाद साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने महात्मा गांधी की मूर्ति यहां स्थापित की थी. बताया जाता है कि पहले गांधी पार्क, पवेलियन ग्राउंड और परेड ग्राउंड एक ही मैदान हुआ करता था, जिसे बाद में तीन भागों में बांट दिया गया.
बापू का देवभूमि से था खास लगाव
देहरादून समेत देवभूमि से बापू का खास लगाव था. आज भी उनकी कई निशानियां यहां देखने को मिलती हैं. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सम्पूर्ण राष्ट्र में आजादी की अलख जगाने के लिए यूं तो महात्मा गांधी ने देशभर का दौरा किया था, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड से उनका खास लगाव था. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वह कई बार उत्तराखंड आए. पहली बार महात्मा गांधी साल 1915 के अप्रैल महीने में कुम्भ के दौरान हरिद्वार और ऋषिकेश आए थे. इसके बाद नैनीताल, हल्द्वानी, देहरादून, मसूरी, अल्मोड़ा सहित राज्य के लगभग सभी हिस्सों में बापू ने आजादी की अलख जगाई थी.
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Tags: Dehradun news, Mahatma gandhi, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : February 13, 2023, 14:53 IST










