Global Recycling Day: कबाड़ से शानदार कमाई, ये कमाल के रीसाइक्लिंग आइडिया...


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देहरादून में वेस्ट मटेरियल से बिजनेस के कई उदाहरण हैं, जैसे इको ग्रुप सोसाइटी प्लास्टिक बोतलों से चबूतरे बनाती है, राखी कतरनों से इयररिंग्स बनाती हैं, संतराम ड्रिफ्ट वुड से स्कल्पचर बनाते हैं.

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रिसाइक्लिंग आइडिया के साथ हजारों की कमाई कर रहें हैं उत्तराखंड के ये लोग

हाइलाइट्स

  • देहरादून में वेस्ट मटेरियल से कारोबार कर रहे लोग.
  • प्लास्टिक बोतलों से बगीचों के चबूतरे और स्टूल बनाए.
  • कतरनों से इयर रिंग्स और पेंडेंट बनाकर बेच रहे हैं.

देहरादून: रोजाना हम कई तरह की चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे कूड़ा-करकट निकलता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन्हीं कचरे से आप नई चीजें बना सकते हैं? आपने स्कूल में वेस्ट मटेरियल से बहुत सी चीजें बनाई होंगी, लेकिन अब आप इन्हें बिजनेस में भी बदल सकते हैं, और वह भी बिना ज्यादा खर्च के. एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल विश्वभर में करीब 2 बिलियन टन से ज्यादा कचरा निकलता है, और भारत में यह आंकड़ा 277 मिलियन टन से भी अधिक है. ऐसे में वेस्ट मटेरियल का इस्तेमाल करके बिजनेस करना एक अच्छा मौका हो सकता है. देहरादून में भी कुछ लोग वेस्ट मटेरियल से कारोबार कर रहे हैं, जिनके कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं. आप भी इनका इस्तेमाल कर अच्छा बिजनेस चला सकते हैं.

1. कोल्ड्रिंक की प्लास्टिक की बोतल
प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. देहरादून की इको ग्रुप सोसाइटी ने इन बोतलों का उपयोग बगीचों और पार्कों के चबूतरे बनाने में किया है, साथ ही स्टूल भी बनाए हैं. आप प्लास्टिक की बोतल को रंगकर और कटिंग करके पौधे लगाने वाले हैंगिंग गमलों की श्रंखला बना सकते हैं और बेच सकते हैं.
2. कतरनों से ईयर रिंग्स
देहरादून की रहने वाली राखी सिलाई करती थीं, जिसमें से कुछ कतरने बच जाते थे. उन्होंने वेलवेट और एंब्रॉयडरी फैब्रिक से इयररिंग्स और पेंडेंट बनाने शुरू किए, जिन्हें वह अब बेच रही हैं. जिससे उन्हें अच्छी कमाई भी हो रही है.
3. ड्रिफ्ट वुड से स्कल्पचर
उत्तरकाशी के संतराम जंगलों से मिली लकड़ी का आकार देखकर उसे पहचानकर हैंडीक्राफ्ट तैयार करते हैं. इस कला को ड्रिफ्ट वुड आर्ट कहते हैं. वे फ्री टाइम में जंगलों में टहनियों से इंसान, किले, और जानवरों की आकृतियां ढूंढने निकल जाते हैं और बिना छेड़छाड़ के उसे प्राकृतिक रूप में संजोकर रखते हैं.

4. ड्रिफ्ट वुड से आर्टिफिशियल झरने
देहरादून के दुर्गा चरण भी ड्रिफ्ट वुड पर काम करते हैं. वे नदियों में बहकर आई लकड़ी पर कलाकारी करके आर्टिफिशियल झरने, प्लांट और टेरेरियम बनाते हैं. उन्होंने लच्छीवाला और मालदेवता जैसे क्षेत्रों से लाकर बहुत सुंदर डेकोरेटिव आइटम्स तैयार किए हैं.

5. पेपर वेस्ट से कठपुतली
अल्मोड़ा के दान सिंह फर्त्याल ने राजस्थान की कठपुतलियों को देख उत्तराखंडी परिधानों में कठपुतलियां बनाना शुरू किया. वह पेपर वेस्ट से कठपुतलियां बनाते हैं और प्रदर्शनी में बेचते हैं, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं.

6. सी शेल और मोतियों से ज्वैलरी
देहरादून की सलोनी ज्वैलरी बनाने का शौक रखती हैं. 15 साल तक कंपनियों में काम करने के बाद उन्होंने ज्वैलरी मेकिंग का काम शुरू किया. वह सी शेल और मोतियों से हैंड रिंग, ब्रेसलेट और इयररिंग्स बनाती हैं. वह इन मोतियों ( अरंडी के बीज) को जंगलों से इकट्ठा करती हैं और कुछ को दुकानों से खरीदती हैं.

7. पीपल लीफ आर्ट
उत्तराखंड की पहली लीफ आर्टिस्ट जया वर्मा पीपल के पत्तों से पेंटिंग बनाती हैं. वह इन पत्तों को सुखाकर उन पर इंसान और इन्फ्रास्ट्रक्चर की चित्रकारी करती हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री धामी, पूर्व सीडीएस बिपिन रावत और केदारनाथ धाम की पेंटिंग बनाई है. इसके अलावा, वह गेहूं की सूखी डंडियों से भी चित्रकारी करती हैं.

8. ऊन से फैशन एसेसरीज
देहरादून की नेहा, जो एक आर्टिस्ट हैं, सूखे फूलों और पत्तियों से हैंडीक्राफ्ट बनाती हैं. वह स्वेटर बुनने के बाद बचे हुए ऊन से हेयर बैंड, की रिंग, ईयर रिंग्स, बुके, फ्लॉवर वास जैसे कई बेहतरीन प्रोडक्ट्स तैयार करती हैं.

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