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Nainital News : नैनीताल में तल्लीताल की रामलीला अपनी अनोखी परंपरा और गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल के लिए फेमस है. 128 साल से चली आ रही इस रामलीला में खास बात यह है कि यहां कलाकारों का मेकअप सईद करते हैं जबकि सीता की भूमिका निदा खान.
तल्लीताल रामलीला समिति के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र पाण्डे (रवि) बताते हैं कि इस रामलीला की स्थापना 128 वर्ष पूर्व हुई थी और इसके नेतृत्व की जिम्मेदारी समय-समय पर कई नामी व्यक्तित्वों ने निभाई. वर्ष 1927 में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत भी इस समिति के अध्यक्ष रहे. शुरू में इसका मंचन वीरभट्टी दुर्गापुर में किया जाता था, बाद में यह स्कूल प्रांगण और अब पास ही बने स्थायी मंच पर होने लगा.
रवि बताते हैं कि रामलीला के इतिहास में सबसे खास बात यह है कि इसकी शुरुआत से ही इसमें विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग जुड़ते रहे हैं. 1897 में जब पहली बार मंचन हुआ था, तब कई मुस्लिम समुदाय के कलाकारों ने अलग-अलग किरदार निभाए थे. यही परंपरा आज भी जारी है. कलाकारों का मेकअप करने वाले सईद अहमद कई वर्षों से रामलीला से जुड़े हुए हैं, वहीं पिछले साल सीता का किरदार स्थानीय छात्रा निदा खान ने निभाकर सौहार्द का संदेश दिया.
नैनीताल की रामलीलाएं हैं खास
तल्लीताल के अलावा नैनीताल की मल्लीताल रामसेवक सभा द्वारा 1918 में रामलीला की शुरुआत की गई थी, जिसे स्व. लक्ष्मी लाल साह (कमांडर साहब) ने स्थापित किया. इसके साथ ही शेर का डांडा (1973) और सूखाताल (1956) की रामलीलाएं भी परंपरा के साथ आज तक जारी हैं. नैनीताल की रामलीलाएं केवल धार्मिक मंचन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी हैं. यहां दर्शकों को सिर्फ भगवान राम की कथा ही नहीं, बल्कि एकता, सद्भाव और भाईचारे का जीवंत संदेश भी मिलता है. यही वजह है कि यह रामलीला न केवल कुमाऊं, बल्कि पूरे देश में एक मिसाल मानी जाती है.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें
