Pithoragarh: खंडहर बनते जा रहे जिले के सरकारी स्कूलों के भवन, क्या होगा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का भविष्य?


रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में शिक्षा के मंदिरों की हालत खराब होते जा रही है. जिले के सरकारी विद्यालय कई साल से मरम्मत की राह देख रहे हैं. जनपद के विद्यालयों की हालत यह है कि कहीं छत से पानी टपक रहा है, तो कहीं फर्श और दीवारें टूटी हुई हैं. ऐसे स्कूलों में पठन-पाठन कार्य कराना विद्यालय प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है. लंबे समय से रखरखाव न होने और बजट के अभाव में सरकारी स्कूलों के भवन खंडहर बनते जा रहे हैं, जिनकी संख्या बढ़ते ही जा रही है. इसका सीधा असर यहां पढ़ने वाले छात्रों पर पड़ रहा है.

सरकारी विद्यालयों की ऐसी दुर्दशा देखकर लगता है कि नीति निर्माताओं का सीमांत के इन विद्यालयों से मोहभंग होते जा रहा है, जिससे गांव-गांव में गुणवत्ता के साथ शिक्षा पहुंचाने के दावे झूठे साबित हो रहे हैं. यहां यह पलायन का एक मुख्य कारण भी बन रहा है.

पिथौरागढ़ जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया से इस संबंध में जब जानकारी मांगी गई, तो जर्जर बन चुके भवनों की चौंकाने वाली संख्या सामने आई. जिले में 87 ऐसे भवन हैं, जो बच्चों के बैठने लायक नहीं हैं. जो बजट के अभाव में खंडहर बनते जा रहे हैं.

बरसात के दिनों इन विद्यालयों में पड़ी दरारों की वजह से बारिश का पानी अंदर घुस रहा है, जिससे स्कूल में रखी किताबें व अन्य कीमती सामान बर्बाद हो रहा है. मुनस्यारी विकासखण्ड के चामी भैंसकोट के ग्राम प्रधान हरीश मेहरा ने अपने गांव की जर्जर हालत के बारे में ‘न्यूज 18 लोकल’ को बताया है कि यहां प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्र खुले में बैठने को मजबूर हैं और बरसात के दिनों में यहां शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है. जिले के सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश कुमार ने सरकारी स्कूलों की बदहाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकारी विद्यालयों की हालत सुधारने में सरकार को विफल बताया है.

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