Pithoragarh News : दारमा वैली है खूबसूरत परंतु विकास से कोसों दूर, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल
रिपोर्ट : हिमांशु जोशी
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के सुदूरवर्ती इलाकों में जितने खूबसूरत इलाके हैं, उतनी ही विकास की मुख्यधारा से दूर यह जगह है. हम बात कर रहे हैं पिथौरागढ़ की दारमा वैली की, जो हिमालय की गोद में बसा हुआ सीमांत क्षेत्र है. यहां की खूबसूरत प्राकृतिक संरचना पर्यटकों को अपनी ओर खूब आकर्षित करती है. पर्यटकों का कुछ समय तो यहां बढ़िया गुजरता है लेकिन अगर लंबे समय के लिए कोई यहां रहना चाहे, तो उसके लिए परेशानियां भी काफी हैं. यहां मूलभूत सुविधाएं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार आदि से यहां के लोग अभी भी कोसों दूर हैं.
यहां अगर किसी की तबीयत बिगड़ जाए, तो दुर्गम रास्तों से होकर उसे 70 किलोमीटर दूर धारचूला में ही इलाज मिल पाता है. ज्यादा स्थिति खराब होने पर मरीजों को जिला मुख्यालय रेफर किया जाता है, जो यहां के लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है. शिक्षा की बात की जाए, तो इस क्षेत्र में स्कूलों की भी कमी है. यहां के सभी छात्र धारचूला या पिथौरागढ़ में रहकर पढ़ाई करते है.
दारमा में स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग
दारमा क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं, जो 6 महीने बर्फ में दबे रहते हैं और 6 महीने ही यहां लोग रहने आते हैं और इन 6 महीनों में देखा जाए तो यहां स्वास्थ्य सेवा भगवान भरोसे ही रहती है. संचार के साधन के लिए इंटरनेट मौजूद है लेकिन वह भी सीमित ही है. यहां के स्थानीय लोग स्वास्थ्य और शिक्षा न मिलने से काफी प्रभावित होते हैं. यहां के लोगों ने अपनी समस्याएं ‘न्यूज़ 18 लोकल’ के माध्यम से साझा करते हुए दारमा में स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करने की मांग की है.
क्षेत्र में स्कूल और अस्पताल का अभाव
स्थानीय निवासी लक्ष्मण सिंह बंग्याल ने कहा कि यहां सड़क सोलर और वीसैट तो लग गए हैं लेकिन अभी तक अस्पताल और स्कूल यहां के लोगों के लिए नहीं बन पाए हैं. इससे हमें दिक्कत होती है. वहीं दुग्तू गांव के निवासी वीरेंद्र दुग्ताल ने कहा कि अस्पताल न होने से यहां के लोगों को धारचूला की दौड़ लगानी पड़ती है. गंभीर हालत में मरीजों की जान पर भी बन जाती है. हमारी मांग है कि स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए यहां व्यवस्था की जाए.
अप्रैल महीने से लग जाता है पर्यटकों का तांता
पिथौरागढ़ की जिलाधिकारी रीना जोशी को जब इस समस्या से रूबरू कराया गया, तो उन्होंने कहा कि सीमांत के गांवों को विकास से जोड़ने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.गौरतलब है कि पिथौरागढ़ के दारमा क्षेत्र में पंचाचूली पर्वत है और इस इलाके में पर्यटकों का अप्रैल महीने के बाद आना शुरू हो जाता है. यहां के लोगों ने पर्यटकों के लिए रहने-खाने की व्यवस्था तो की हुई है लेकिन अभी भी स्वास्थ्य सेवाएं यहां नहीं होने से पर्यटक ज्यादा दिन यहां नहीं रुक पाते हैं. ऐसे में जरूरत है तो इस इलाके में सभी मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने की, जिससे यहां के स्थानीय लोगों और टूरिस्ट को राहत मिल सके.
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Tags: Pithoragarh news, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : April 14, 2023, 17:46 IST