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OPINION: महज पत्थरों का ढेर नहीं, जोशीमठ हूं मैं; मुझसे ही होकर जाता है स्वर्ग का रास्ता

‘यूं ही मैं जोशीमठ नही बना हूं…,’ यहां तक पहुंचने की मेरी एक लम्बी यात्रा है. एक ऐसी यात्रा जो कुछ महीनों या सालों की न होकर, कई सदियों की है. इस यात्रा में मैंने कई बदलावों को देखा. लेकिन, जैसा बदलाव आजकल मैं देख रहा हूं, उसकी कल्पना तो शायद ही किसी ने की होगी. जो हश्र मेरा होने जा रहा है, उसकी भविष्यवाणी तो आदिगुरू शंकराचार्य भी नहीं कर पाए थे. फिर क्यों मेरा आंगन छलनी-छलनी हुए जा रहा है? क्यों हर पल मेरी छाती फट रही है? और दरकते मेरे आंगन की दरारों में जैसे सबकुछ जमींदोंज ... Read more