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शिवानी जैसी लोकप्रिय लेखिका किसी भाषा में कम ही होती हैं

हिंदी में लोकप्रियता और श्रेष्ठता को लेकर विवाद लंबे समय से चला आता रहा है. कुछ लोग लोकप्रिय साहित्य में श्रेष्ठता का तत्व नहीं देखते हैं जबकि, कुछ लोगों का मानना है कि श्रेष्ठता का कोई एक मानक और मानदंड नहीं है. इसलिये हर रचना या कलाकृति को इस कसौटी पर नहीं कसा जा सकता है. इसलिए श्रेष्ठता के नाम पर लोकप्रिय को हाशिये पर नहीं धकेला जा सकता है. हिंदी साहित्य के इतिहास में देखा यह गया है कि लोकप्रिय साहित्य को दोयम दर्जे का माना गया है और उसे साहित्य की मुख्य धारा में शामिल नहीं किया गया ... Read more