कमल पिमोली/श्रीनगर गढ़वाल. उत्तराखंड के गढ़वाल विश्वविद्यालय (Garhwal University) के पूर्व कुलसचिव प्रो. पीएस राणा को उत्तराखंड गौरव सम्मान (Uttarakhand Gaurav Samman) से सम्मानित किया गया है. उन्हें यह सम्मान समाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने के लिए प्रदान किया गया है. पहले भी इस सम्मान को IAS कमल टावरी, प्रो. जेपी पचौरी, कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत जैसे सामाजिक, राजनीतिक और जन-सरोकारों के क्षेत्र में कार्य कर चुके व्यक्तियों को प्रदान किया गया है.
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (HNBGU) के वरिष्ठ प्रोफेसर पीएस राणा ने अपनी लंबी सेवा अवधि के बाद 31 जुलाई को सेवानिवृत्ति प्राप्त की. उन्होंने चार दशकों तक प्रशासनिक सेवा से लेकर शैक्षिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनके प्रबंधनकाल में गढ़वाल विश्वविद्यालय ने कई महत्वपूर्ण कीर्तिमान स्थापित किए.
बेहद सामान्य परिवार से आने वाले प्रोफेसर पीएस राणा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा टिहरी से पूरी की. हाई स्कूल और इंटर की पढ़ाई के बाद उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय के टिहरी परिसर में बीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया. बीए के बाद, उन्होंने अपनी रुचि के अनुसार अर्थशास्त्र विषय में एमए की पढ़ाई पूरी की. तब वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे. वे छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाते थे, लेकिन पढ़ाई में अधिक मन लगने के कारण राजनीति की बजाय उन्होंने पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया और 1986 में अर्थशास्त्र विषय से पीएचडी पूरी की. पीएचडी पूरी होने के बाद, उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय में लेक्चरर, सीनियर लेक्चरर और रीडर के पदों पर सेवाएँ देने के बाद 2006 में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में तैनात हुए. इस अवधि में, उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों का कार्य भी किया. राज्य आंदोलन के दौरान भी प्रोफेसर राणा ने अपना योगदान दिया था.
कई प्रशासनिक पदों पर रहे तैनात
प्रो. राणा को पहली बार 1989 में गढ़वाल विश्वविद्यालय में स्पोर्ट्स सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किया गया. इसके बाद, उन्होंने छात्रावास अधीक्षक, असिस्टेंट परीक्षा नियंत्रक, चीफ प्रॉक्टर, मुख्य छात्रावास अधीक्षक, एकेडमिक काउंसिल के सदस्य बनने से लेकर डीएसडब्लू और कुलसचिव के पद तक अपनी सेवाएं दी. उनके कार्यकाल में, वे कई छात्रों की मदद करने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे. प्रो. राणा ने अपने कार्यकाल में 20 से अधिक रिसर्च पेपर प्रकाशित किए, साथ ही कई किताबें भी लिखीं.
अब सामाजिक कार्यों में लेंगे हिस्सा
उत्तराखंड गौरव सम्मान से सम्मानित होने के बाद प्रो. पीएस राणा ने बताया कि वह उन भाग्यशाली लोगों में से एक हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला है. अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के हित के लिए काफी काम किया. अब सेवानिवृत्त होने के बाद, वह सामाजिक क्षेत्रों में भी कार्य करेंगे. ग्रामीण क्षेत्रों और राज्य में हो रहे पलायन, रोजगार की संभावनाओं को लेकर, और समाज के विकास के लिए हर संभव काम करेंगे. उन्होंने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय पहाड़ के लोगों को उच्च शिक्षा देने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज स्थिति यह है कि यहां पहाड़ के छात्र और लोग शिक्षा और रोजगार से वंचित हैं. इस दिशा में ध्यान देने की सख्त आवश्यकता है.
हर जरूरतमंद छात्र की मदद करते थे प्रो. राणा
पर्वतीय विकास शोध केन्द्र के डॉ. अरविंद दरमोडा ने बताया कि प्रो. राणा यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने वाले छात्रों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए जरूरतमंद छात्रों की मदद करते थे. जो लोग उत्तराखंड के गौरव को बढ़ाने का काम करते हैं, उन्हें इस सम्मान (उत्तराखंड गौरव सम्मान) से नवाजा जाता है. गृह सचिव रह चुके आईएएस डॉ. कमल टावरी से उत्तराखंड गौरव सम्मान की श्रृंखला की शुरुआत की गई है, जो निरंतर जारी रहेगी.
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FIRST PUBLISHED : August 03, 2023, 11:02 IST
