अन्तरराष्टÑीय महिला दिवस विशेष 7 : यह हैं कोटा की कमांडर, जिनके साय में महफूज शिक्षा नगरी

कोटा। निगाहों से छलके वो कतरे अब नहीं हैं उसकी पहचान…, 
खामोशी को छोड़ उसने छू लिया है आसमान,
पथरीली राहों पर चलना अब लगता है उसे आसान, 
हौसला और हिम्मत ही है अब उसकी असली पहचान…
लाखों परिवारों की निगेहबान हैं महिला अधिकारी 

कहते हैं, बिजली चमकती हैं तो आकाश बदल देती हैं और जब आंधी उठती हैं तो दिन-रात बदल देती हैं, लेकिन जब-जब नारी शक्ति गरजती है तो, इतिहास ही बदल देती है। महिलाओं के नाम समर्पित आज के इस खास दिन पर हम आपको मिलाने जा रहे हैं, ऐसी शख्सियत से जिन्होंने अपने अदम्य साहस और कुशल नेतृत्व से कोटा की लगाम अपने हाथों में संभाल रखी है। चाहे बात अपराधियों को उनकी औकात दिखाने की हो या फिर बीमारियों के शिकंजे में फंसी जिंदगी को खुशी लौटानी हो। हर क्षेत्र में नारी शक्ति बखूबी अपना फर्ज निभा रहीं हैं।  दरअसल, जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर महिलाएं आसीन हैं, जो हर दिन चूनौतियों के बीच घर-परिवार की जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्व के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं। पेश हैं रिपोर्ट के प्रमुख अंश….

ऐसी आरएएस जिसने बदली महिलाओं की जिंदगी 
कोटा यूनिवर्सिटी में कुल सचिव ममता तिवारी प्रदेश की पहली ऐसी महिला आरएएस ऑफिसर हैं, जिन्होंने अपने नवाचार से महिलाओं का जीवन बदला। उनकी उपलब्ध्यिों से वे राजस्थान ही नहीं देश-विदेश में भी सुर्खियों में रहीं।  ममता कहतीं हैं, 2017 में बूंदी एडीएम रहते हुए बूंदी जिले में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की। इसके लिए सरकार ने आंचल वत्सला पुरस्कार से 2018 में सम्मानित किया। वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट कार्य करने पर पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने आईटी अवार्ड से नवाजा। कोटा में जिला परिषद में सीईओ रहते हुए बेहतरीन कार्यों के लिए राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने 2 अक्टूबर 2022 को नई दिल्ली में राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। हाल ही में 26 जनवरी को राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा चुनाव में कोटा जिले में बेहतरीन कार्य करने पर राज्य स्तरीय निर्वाचन पुरस्कार से पुरस्कृत किया। मई 2021 में जिला परिषद में कई नवाचार किए। जिससे राज्य स्तर पर कोटा प्रथम रहा। मैने जिले की  अनेक ग्राम पंचायतों में खुद की नर्सरी बनवाई। आवास विहीन लोगों के लिए मोड़क में आवासीय कॉलोनी विकसित करवाई। 2021 में अंतरराष्ट्रीय पत्रिका अमेरिकन जर्नल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च में भारत के स्वच्छता अभियान पर लिखे लेख को अमेरिका के अकादमिक जगत में सराहना प्राप्त हुई। रेवेन्यू बोर्ड व राजस्थान विधान सभा के जर्नल में 20 लेख प्रकाशित हो चुके हैं। जिले की सभी आगनबाड़ियों में 100 प्रतिशत शौचालय बनवाए। नरेगा श्रमिकों की मजदूरी में करप्शन पर लगाम लगाने के लिए आधार आधारित भुगतान करवाया।  आरएएस अधिकारी ममता वर्तमान में न्यायालय भू प्रबंध अधिकारी कोटा के पद पर कार्यरत है। 

राशन माफियाओं को पहुंचाया जेल 
कृषि विश्वविद्यालय में कुल सचिव आरएएस ऑफिसर सुनीता डागा बतातीं हैं, वाक्या वर्ष 2012 का है, अजमेर में जिला रसद अधिकारी के रूप में पहली पोस्टिंग मिली। वहां राशन डीलरों की एक यूनियन थी, जो कालाबजारी में लिप्त थे। दुकानें भी उनकी पत्नियों के नाम थी। इलाके में इन यूनियन सदस्यों का इतना खौफ था कि रसद विभाग के कोई भी कर्मचारी इनके खिलाफ नहीं बोलते थे। यह यूनियन रसद सप्लाई में गड़बड़ी करती थी। कमीशन का खेल चलता था। इस पर मैंने इनके खिलाफ एक्शन लिया तो एक दर्जन से ज्यादा लोग ऑफिस आ गए और मेरे चैम्बर के दरवाजे को धक्का देकर अंदर घुस आए। डराने-धमकाने का प्रयास किया। उस दिन मैंने इन्हें सबक सिखाने की ठान ली। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मेरे ऑफिस का कर्मचारी भी साथ खड़ा नहीं हुआ। लेकिन, तत्कालीन जिला कलक्टर ने सहयोग किया। इसके बाद हमने एफआईआर दर्ज करवाकर आरोपी राशन डीलरों को जेल भिजवाया। इसके बाद से राशन में कालाबजारी व कमीशन का खेल पर अंकुश लग गया। 

राजस्थान का मोस्ट वांटेड को दबौचा  
2016 बैच की आईपीएस अमृता दुहन लेडी सिंघम के नाम से जानी जाती हैं। जोधपुर में लोरेंस गैंग के ठिकानों पर दबिश देकर 22 बदमाशों को पकड़ सुर्खियों में रहीं। कोटा शहर पुलिस अधीक्षक दुहन कहतीं हैं, वर्ष 2023 में हत्या के मामले में जेल में बंद कुख्यात अपराधी पैरोल से फरार हो गया था। फरारी में ही उसने दो मर्डर और कर दिए थे। वह राजस्थान का टॉप-3 मोस्ट वांटेड था, जिस पर एक लाख का ईनाम था। पुलिस की दबिश से पहले ही वह अपनी जगह बदल देता था। हमें भटकाने के लिए उसने 30 बार से ज्यादा पुलिस के नम्बर पर फेक कॉल करवाए। आसूचनाओं को एकत्रित  सुराग खोजा और 6 महीने बाद आरोपी को गुजरात से धर दबौचा। इसके अलावा नवम्बर 2022 में जोधपुर में एक व्यापारी के साथ 16 करोड़ का साइबर फ्रॉड हुआ। ठगों ने व्यापारी को जाल में फंसाकर 101 बार ट्रांजैक्शन करवाकर करोड़ों ठगे। फ्रॉड में विदेशी गैंग भी शामिल थी। आरोपियों को पकड़ने के साथ रिकवरी करवाना चूनौति था। आखिरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर 80 प्रतिशत राशि की रिकवरी भी करवाई। 

इस लायक बनो की आपकी आवाज सुनी जाए
यूआईटी में वरिष्ठ लेखाधिकारी डॉ. नीतू सिंह कहती हैं, महिलाओं को हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ता है। शिक्षा व आत्म कौशल हमें इस लायक बना सकता है कि समाज में आप एक प्रेरणा बन सकें। जेडीबी कॉलेज की छात्र नेता रहीं डॉ  सिंह वर्ष 2010 से छात्राओं में आत्म विश्वास विकास के लिए समर्पित रहीं। महिलाओं व लड़कियों की सुरक्षा के लिए झांसी रानी फोर्स बनाई। पुलिस कॉलेज में तैनात करवाई। ऑटो-रिक्शों को कॉलेज से दूर खड़े करवाए। खुद को एक बार फिर साबित करने के मानस से आरपीएससी फाइट किया। बचपन से ही समाज के लिए कुछ करना चाहती थी इसलिए आरएएस बनना चाहती थी। 2018 की आरएएस परीक्षा फाइट कर आरएएस अधिकारी बनी। डॉ. नीतू कहती हैं, नौकरी के साथ गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहती हूं, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण जीवन मिल सके। इसके लिए एक एनजीओ से जुड़ी हूं। यदि, कोई बेटी पढ़ना चाहती है तो किसी भी बंदिश की वजह से पढ़ाई न छोड़े, क्योंकि शिक्षा औऱ  कौशल उनकी पहचान बना सकता है, और तब आप समाज को और बेहतर बना सकती हैं। 

क्यूआर कोड स्कैन करो, तुरंत होगी सफाई
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य संगीता सक्सैना कहती हैं, कुर्सी पर बैठना स्टेट्स सिंबल नहीं बल्कि जनसमुदाय के प्रति उत्तरदायित्व है। इलाज की राह आसान करना ही मेरा लक्ष्य है। मेरे पास 5 बड़े और 4 छोटे अस्पताल है, जिसे नियंत्रित रखना अपने आप में चुनौतिपूर्ण है। व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए कई बार कड़वे फैसले भी लेने पड़ते हैं। सुबह 10 से शाम 7 बजे तक ऑफिस में रहती हूं। इस दौरान यही कोशिश रहती है कोई भी इलाज के लिए परेशान न रहे। मेरे पास तीन चैलेंज है, पहला सफाई, क्राउड को नियंत्रित करना और हर जगह एरिया एक्सीलेंस डवलप करने पर फोकस है। इसके लिए सभी बड़े अस्पतालों में जगह-जगह क्यूआर कोड लगवाए हैं। कहीं भी गंदगी नजर आए तो दीवारों पर लिखे क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन शिकायत करें, आधे घंटे में सफाईकर्मी मौके पर पहुंच तुरंत सफाई करेंगे। प्लेसमेंट एजेंसी को हायर किया है। अस्पतालों में डॉक्टर व मरीज के बीच परिवार जैसा रिश्ता कायम कर रहे हैं। मरीजों को इलाज के साथ अपनत्व भी मिले, ऐसा परिवेश बना रहे हैं।

हत्यारे व रेपिस्ट को भिजवाया जेल
क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला कोटा की अतिरिक्त निदेशक डॉ. राखी खन्ना ने कहती हैं, 1998 में फोरेंसिक डिपार्टमेंट ज्वाइन किया था। जब मौत की असली वजह ढूंढते हैं और उससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है तो सुकून मिलता है। जयपुर ग्रामीण के फागी क्षेत्र में 7 वर्षीय मासूम से रेप का केस हुआ था। मौके पर हमने सैम्पल कलेक्ट किए। कपड़ों में एक बाल मिला, जिसकी जांच कर पूरी वारदात का पर्दाफाश किया। मौके पर सीमन व ब्लड सैंपल से मिलाकर आरोपी की पहचान करवाई। मेरी रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसी तरह कोटा में नाबालिग छात्रा की हत्या के मामले में भी खुलासा कर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलवाई। डॉ. राखी अब तक जयपुर बम ब्लास्ट, आनंदपाल एनकाउंटर केस, वाइल्ड लाइफ, रेप, मर्डर, हत्या को सुसाइड में बदलना, तस्करी सहित कई ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी खोल आरोपियों को सजा दिला चुकी हैं। डॉ. खन्ना को कई बेस्ट साइंटिस अवॉर्ड मिले हैं। वहीं, राष्टÑीय व अंतरराष्टÑीय स्तर पर कई जनरल प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने नेशनल इंस्टिट्यूड क्रिमीलोजी एंड साइंटिस नई दिल्ली से फोरेंसिक कोर्सेज, साइबर, टॉक्सीलॉजी सहित कई कोर्सेज किए हैं।

दो बड़े प्रशासनिक पदों को अकेली संभाल रहीं डॉ. दीपिका
मेडिकल कॉलेज में कार्यरत डॉ. दीपिका मित्तल नारी शक्ति की अवधारणा साकार कर रहीं हैं। चिकित्सा क्षेत्र में दो बड़े महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को कुशल नेतृत्व से अकेली संभाल रहीं हैं। एडिशनल प्रिंसिपल द्वितीय  डॉ. मित्तल बतातीं हैं, अप्रेल 2019 में वे चीफ अकेडमिक ऑफिसर बनीं। यह पहला मौका था जब कोटा मेडिकल कॉलेज में पहली बार कोई महिला इस पद तैनात हुई थीं। जब ज्वाइन किया तो लोगों ने बातें बनाई कि ये पद चूनौतियों से भरा है, यह काम महिलाओं के बस का नहीं है। लेकिन, आज भी मुख्य शैक्षणिक पद को संभाल रहीं हूं। वहीं, 1 अक्टूबर 2021 में मुझे मेडिकल कॉलेज का अतिरिक्त प्रधानाचार्य द्वितीय भी बनाया गया। वर्तमान में डॉ. दीपिका, चीफ अकेडमिक ऑफिसर व अतिरिक्त प्रधानाचार्य द्वितीय का कार्यभार संभाल रहीं हैं। अहमदाबाद से मेडिकल एजुकेशन का प्रशिक्षण प्राप्त कर 2013 से 2023 तक डॉ. दीपिका मेडिकल एजुकेशन यूनिट की कोर्डिनेटर रही। अपनी एमईयू टीम के साथ टीचर्स को एनएमसी मानको से फैकल्टी डेवलपमेंट ट्रेनिंग करवाई।