ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में पहली बार अंडर ग्रेजुएशन कोर्सेज में सेमेस्टर सिस्टम के तहत परीक्षाएं होंगी, जिसमें करीब 80 हजार रेगुलर और 65 हजार से 70 हजार नॉन कॉलेजिएट छात्र भाग लेंगे। आरयू के संघटक और सम्बद्ध कॉलेजों में जनवरी के पहले सप्ताह में पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होंगी। विश्वविद्यालय का शेड्यूल नई एजुकेशन पॉलिसी के प्रावधानों के तहत करीब एक महीना देरी से चल रहा है। आरयू प्रशासन का दावा है कि सेकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं एनईपी के प्रावधानों के तहत ही होंगी। विश्वविद्यालय में राज्यपाल और सरकार की ओर से मिले निर्देशों के तहत इस सत्र में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 लागू करनी थी,जिसके प्रयास मई महीने से ही शुरू कर दिए गए थे। विश्वविद्यालय कुलपति की ओर से कमेटी बनाई गई थी।
इसके बाद एक ड्राफ्ट तैयार किया गया और अगस्त में एनईपी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इसके साथ ही विश्वविद्यालय से जुड़े संघटक और संबद्ध कॉलेजों में ये मैसेज भी प्रसारित किया कि इस बार नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू हो रही है। नई कुलपति प्रो. अल्पना कटेजा ने इसे प्राथमिकता पर लिया और नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत ही सिलेबस तैयार करते हुए इसे इंप्लीमेंट किया गया।
जनवरी फर्स्ट वीक में एग्जाम
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में 1 दिसंबर से 15 दिसंबर तक पहले सेमेस्टर का एग्जाम होने का प्रावधान है। इसके बाद 16 दिसंबर से 31 दिसंबर तक अवकाश और फिर 1 जनवरी से सेकेंड सेमेस्टर शुरू होकर, उसकी कक्षाएं 30 अप्रैल तक होने और फिर सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षाएं 1 मई से 15 मई तक कराकर डेढ़ महीने के हॉलीडेज का प्रावधान है। नॉन कॉलेजिएट के लिए परीक्षा पैटर्न में थोड़ी अलग व्यवस्था की गई है, इनमें कुछ सब्जेक्ट ऐसे हैं जिसमें दोनों सेमेस्टर के एग्जाम मई में एक साथ कराने का प्रयास किया है। इसके अलावा नॉन कॉलेजिएट के मिड टर्म एग्जाम भी नहीं होते, इसलिए उनके कंटिन्यू असेसमेंट प्रोग्राम नहीं होंगे। ऐसे में उनके मिड टर्म एग्जाम के मार्क्स मुख्य परीक्षा में ही जोड़े जाएंगे।
