इस वाटिका में मौजूद हैं हिमालयी पेड़ पौधों की सैकड़ों प्रजातियां, रिसर्च करने वालों के लिए है खास


Last Updated:

Bageshwar News: किशन मलड़ा ने बागेश्वर के मंडलसेरा में देवकी लघु वाटिका बनाई है, जिसमें 280 हिमालयी पेड़-पौधों की प्रजातियां संरक्षित हैं. यह रिसर्च स्कॉलर्स के लिए उत्कृष्ट रिसोर्स सेंटर है.

X

रिसर्च लायक पौधे दिखाते पर्यावरण विद् किशन मलड़ा 

बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों की पहचान केवल प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है. यहां के वृक्ष प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता किशन मलड़ा ने बागेश्वर के मंडलसेरा क्षेत्र में अपने निजी प्रयासों से एक विशेष वनस्पति वाटिका तैयार की है. जिसे देवकी लघु वाटिका के नाम से जाना जाता है. इस वाटिका की सबसे खास बात यह है कि यहां करीब 280 प्रकार के हिमालयी पेड़-पौधों की प्रजातियां संरक्षित हैं. जिनमें दुर्लभ, औषधीय और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधे भी शामिल हैं. यदि आप वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) के छात्र हैं. रिसर्च स्कॉलर हैं, या पर्यावरण विषय में किसी प्रकार की उच्च शिक्षा (जैसे पीएचडी) कर रहे हैं. तो यह वाटिका आपके लिए एक उत्कृष्ट रिसोर्स सेंटर बन सकती है.

बागेश्वर के पर्यावरण विद् किशन मलड़ा ने लोकल 18 को बताया कि यहां आने वाले छात्रों को रिसर्च के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता और सबसे अहम बात यह है कि इस काम में खुद किशन मलड़ा और उनका परिवार शोधार्थियों को हर संभव सहयोग प्रदान करता है. छात्रों को पौधों की पहचान, उनकी विशेषताएं, उपयोग, पारिस्थितिकीय भूमिका जैसी अहम जानकारियों को समझने का अवसर मिलता है.

देवकी लघु वाटिका में मिलने वाले पेड़-पौधों में बुरांश, मेहंदी, चुल्लू, अतीस, चिमल, तिमुर, किनगोड़, और रिंगाल जैसे स्थानीय पौधे शामिल हैं. जो केवल हिमालयी क्षेत्र में ही पाए जाते हैं. यहां आने वाले छात्र इन पौधों के जीवन चक्र, अनुकूलन क्षमता, औषधीय गुण और जलवायु पर प्रभाव का अध्ययन कर सकते हैं. किशन मलड़ा बताते हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ पौधों को संरक्षित करना नहीं है, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रकृति के करीब लाना और स्थानीय जैव विविधता को समझने का अवसर देना है.

इसके तहत वे स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को वाटिका भ्रमण के लिए प्रेरित करते हैं और कई बार स्वयं गाइड की भूमिका भी निभाते हैं. यदि आप इस विषय में रुचि रखते हैं तो आप सीधे मंडलसेरा स्थित किशन मलड़ा के आवास के पास स्थित इस वाटिका में संपर्क कर सकते हैं और हिमालय की वनस्पति विविधता को करीब से समझने का सुनहरा अवसर प्राप्त कर सकते हैं. यह पहल बागेश्वर को शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है.

भारत पाकिस्तान की ताज़ा खबरें News18 India पर देखें
homeuttarakhand

इस वाटिका में मौजूद हैं हिमालयी पेड़ पौधों की सैकड़ों प्रजातियां