उत्तराखंड में एक ऐसा होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, जहां 15 साल से प्रिंसिपल ही नहीं!


रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. किसी भी स्कूल-कॉलेज या अन्य इंस्टीट्यूट में प्रिंसिपल का होना अनिवार्य होता है, पर उत्तराखंड के अल्मोड़ा में एक ऐसा संस्थान भी है, जहां पर करीब 15 साल से प्रिंसिपल की तैनाती नहीं हो पाई है. इस इंस्टीट्यूट के बच्चे और टीचर आज भी प्रिंसिपल की राह देख रहे हैं. खाली कुर्सी और बंद दरवाजे को देखकर छात्र और टीचर मायूस लौट जाते हैं. यहां का चार्ज प्रशासन को दिया गया है और वर्तमान में एसडीएम के पास कार्यभार है. हम बात कर रहे हैं जगत सिंह बिष्ट राजकीय होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की. इसकी स्थापना 1991 में हुई थी. यहां से पढ़े हुए कइयों छात्र भारत के अलग-अलग राज्यों और दुबई, कतर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मालदीव समेत अन्य देशों में नौकरी कर रहे हैं.संस्थान में प्रिंसिपल की कमी छात्र-छात्राओं को हमेशा से खलती रही है. वर्तमान में यहां पर 176 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.

छात्र दीपक कुमार ने कहा कि इंस्टीट्यूट में प्रिंसिपल न होने से छात्रों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है. पिछले 6 महीने से उनके कॉलेज में टीचरों की कमी चल रही थी. प्रिंसिपल होते तो इस विषय को बेहतर समझते और इसका हल करते. एक बार सबसे ज्यादा परेशानी सीनियर्स को हुई थी. उनके रिजल्ट में गलत नंबर जुड़ गए थे. अगर प्रिंसिपल होते तो ये सभी दिक्कतें आसानी से सुलझ जातीं. छात्र रविंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दिनों उनके रिजल्ट में कई गलतियां पाई गई थीं. उसको ठीक करने के लिए टीचर देहरादून गए थे. अगर प्रिंसिपल होते तो वह अपने स्तर से इन दिक्कतों का समाधान कर पाते. वैसे तो प्रशासन अस्थायी तौर पर इस कॉलेज के प्रिंसिपल के दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, पर अधिकारी भी कॉलेज में कितना समय दे पाएंगे. उनको अन्य महत्वपूर्ण काम भी होते हैं. उन्होंने कहा कि इंस्टीट्यूट में जल्द से जल्द प्रिंसिपल की तैनाती हो, जिससे छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो.

उत्तराखंड में होटल मैनेजमेंट के दो सरकारी संस्थान

इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ प्रवक्ता धीरेंद्र सिंह मर्तोलिया ने कहा कि कॉलेज में अगर कोई भी प्रैक्टिकल होता है, तो उसके लिए पहले टेंडर प्रक्रिया करनी पड़ती है. अगर यहां पर परमानेंट प्रिंसिपल की तैनाती हो जाएगी, तो यह प्रक्रिया कॉलेज में ही हो सकेगी. इसके अलावा छात्र-छात्राओं को भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिस वजह से वह अपनी समस्याओं को नहीं रख पाते हैं. उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में होटल मैनेजमेंट के दो ही सरकारी संस्थान हैं, पहला देहरादून में और दूसरा अल्मोड़ा में. अल्मोड़ा में प्रिंसिपल की तैनाती पिछले 15 साल से नहीं हो पाई है. इसके लिए विभाग को कई बार पत्र भी लिखा जा चुका है.

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