उफ्फ! चांद पर पहुंच गई दुनिया और यहां आज भी गरारी से पुल पार करते हैं बच्चे


Agency:News18 Uttarakhand

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Pithoragarh: आज के आधुनिक समय में जब दुनिया कहां से कहां पहुंच रही है, ऐसे में पिथौरागढ़ में गौरी नदी पर पुल तक नहीं है. यहां के लोगों, यहां तक कि बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करने के लिए गरारी से आना-…और पढ़ें

तहसीलदार को ज्ञापन देते ग्रामीण 

हाइलाइट्स

  • पिथौरागढ़ में पुल न होने से लोग गरारी से नदी पार करते हैं.
  • ग्रामीणों ने पक्का पुल बनाने की मांग की है.
  • पुल न बनने पर ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं.

पिथौरागढ़: उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के घुरुड़ी और मनकोट के पास गौरी नदी में गरारी से आवाजाही करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ. वायरल वीडियो पर पिथौरागढ़ ही नहीं अन्य जगहों के लोगों ने भी सिस्टम पर खूब सवाल उठाए. सोशल मीडिया पर उमड़ते जोश को देकर पुल बनने की उम्मीद छोड़ चुके ग्रामीण एक बार फिर सिस्टम का दरवाजा खटखटाने तहसीलदार के पास पहुंचे. यहां पहुंचकर गोरी नदी पर पक्का पुल बनाने की मांग की. मांग को लेकर तहसीलदार चंद्र प्रकाश आर्या को ज्ञापन भी दिया.

कब तक डालेंगे जोखिम में जान
तहसीलदार से वार्ता करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि कब तक हम और हमारे बच्चे जान जोखिम में डालकर गरारी से नदी पार करेंगे. अब तो पक्का पुल बना दीजिए. घुरुड़ी और मनकोट के ग्रामीणों  ने कहा कि वे अब तक गोरी नदी में लगी गरारी के सहारे पुल पार कर रहे हैं. उन्होंने इसकी जगह पक्का पुल बनाने की मांग की है. मामले में कार्यवाही को लेकर तहसीलदार चंद्र प्रकाश आर्या को ज्ञापन दिया.

पहले भी उठ चुकी है मांग
ग्रामीणों ने तहसीलदार को दिए गए ज्ञापन में कहा कि गोरी नदी पर पुल न होने से वह और उनके बच्चे गरारी से खतरे के बीच आवाजाही कर रहे हैं. हर रोज जान जोखिम में डालकर छात्र स्कूल पहुंच रहे हैं. बीते दिनों सोशल मीडिया पर गरारी से नदी पार करने का वीडियो भी वायरल हुआ है. उस वीडियो में छात्रों को नदी पार कराने के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई. ऐसे में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. पूर्व में पक्का पुल न बनने तक गरारी से छात्रों को नदी पार कराने के लिए पीआरडी जवानों की तैनाती की मांग की गई थी. लेकिन इसपर भी प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई.

सालों से उठा रहे हैं खतरा
ग्रामीणों ने कहा कि सालों से वह और उनके बच्चे खतरा उठाकर गरारी से नदी पार कर रहे हैं, लेकिन किसी की नजर इस पर नहीं पड़ रही. अगर यहां पक्का पुल बनता तो सभी की परेशानी कम हो जाती. ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जल्द पक्के पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे. ग्रामीण रणजीत सिंह ने कहा कि वर्षों में हमारे दैनिक जीवन इसी गरारी से होकर गुजरता है.

नहीं मिल रही हैं मूलभूत सुविधाएं
उन्होंने आगे कहा कि इससे हमारी दिनचर्या के कई काम प्रभावित होते हैं. स्कूली बच्चों का जरूरत से अधिक समय बर्बाद होता है. ग्रामीणों को गरारी से आवाजाही करने में अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इसलिए गरारी से आवाजाही करने को मजबूर हैं. प्रशासन ने हमारी सुध लेनी चाहिए. ताकि आधुनिक युग में हमें भी मूलभूत सुविधाएं मिल सकें.

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