कुमाऊंनी संस्कृति को मॉडर्न रूप दे रहीं शिवांशी जोशी, ‘पहाड़ी चेली’ को बना दिया ब्रांड


तनुज पाण्डे/ नैनीताल. देवभूमि उत्तराखंड जितना अपनी खूबसूरत भौगोलिक संरचना के लिए जाना जाता है, उतना ही अपनी संस्कृति और लोककला के लिए भी जाना जाता है. चाहें यहां का नृत्य हो या फिर गेरू (लाल मिट्टी) और बिसवार (चावल को पीस कर बना सफेद रंग) से बने ऐपण. दशकों से चली आ रही इस लोककला को जीवंत रखने का काम उत्तराखंड के बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन नैनीताल से महज 23 किलोमीटर की दूरी में स्थित ग्रामसभा गागर की शिवांशी जोशी कर रही हैं. नैनीताल में पली-बढ़ी शिवांशी की स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई नैनीताल से ही पूरी हुई है. उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही ऐपण की शौकीन रही हैं और अपने इस शौक को ही उन्होंने अब अपना पेशा बना लिया है, जो उत्तराखंड की लोक कला को नया आयाम दे रहा है. साथ ही उन्हें स्वरोजगार भी मिल रहा है.

शिवांशी जोशी ने उत्तराखंड की लोककला ऐपण को मॉडर्न तरीके से पेश किया है, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है. उन्होंने की-चेन, फ्रिज मैग्नेट, कार हैंगिंग, टी कोस्टर, फ्लैग्स, नेम प्लेट्स, पूजा थाल, दीए, कैनवास पेंटिग्स समेत कई चीजों कोऐपण कला के माध्यम से सजाया है और उत्तराखंड की इसऐपण कला को मॉडर्न रूप दिया है.

ऐपण को मॉडर्न स्टाइल में पसंद कर रहे लोग

शिवांशी ने बताया कि उनके कस्टमर भी उनसे मॉडर्न ऐपण की डिमांड करते हैं और उन सब उत्पादों को पसंद भी करते हैं. उनके बनाए गए आइटम्स की दिल्ली समेत कई राज्यों तक डिमांड है.

नौकरी छोड़ शुरू किया अपना ब्रांड

उन्होंने बताया कि वह इससे पहले नैनीताल में जॉब कर रही थीं लेकिन अपने पहाड़ की संस्कृति को समृद्ध करने और लोगों के सामने मॉडर्न तरीके से पेश करने और कुछ अलग करने की चाह के चलते उन्होंने जॉब छोड़कर 2018 में ‘पहाड़ी चेली’ नाम से अपने ब्रांड की शुरुआत की, जिसे लोगों ने खूब प्यार दिया. उन्होंने लॉकडाउन के बाद इसे ही अपने रोजगार का जरिया बना लिया.

ऑनलाइन और प्रदर्शनी के माध्यम से मार्केटिंग

शिवांशी ने बताया कि उनके इंस्टाग्राम पेज (Pahadichelis) के माध्यम से ही वह ऑर्डर लेती हैं और अपने उत्पादों को देश के विभिन्न राज्यों में भी बेचती हैं. इसके अलावा वह कई जगह प्रदर्शनी में भी अपने उत्पादों को लेकर जाती हैं और स्टॉल लगाकर उत्पादों की मार्केटिंग करती हैं. उनके द्वारा साल के हर सीजन में एग्जीबिशन भी लगाई जाती है. उन्होंने कहा कि वह हमेशा पहाड़ की विलुप्त होती संस्कृति व लोककला को मॉडर्न रूप में प्रदर्शित करती रहेंगी. शिवांशी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी संस्कृति को बचाने और अपनी जड़ों से जुड़े रह कर कुछ अलग करें.

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