कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल. मिट्टी हमारे पास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों में से एक है. पेशे से रसायन विज्ञान का एक शिक्षक इसी मिट्टी से कोरे कागज पर खूबसूरत आकृतियां उकेरता हैं. उत्तराखंड के कीर्तिनगर निवासी जयकृष्ण पैन्यूली इसी मिट्टी का प्रयोग चित्रकारी के लिए करते हैं. वें पेंटिंग बनाने में किसी भी तरह के कृत्रिम रंग का प्रयोग नहीं करते हैं. जयकृष्ण पैन्यूली 10 सालों से मिट्टी से पेंटिंग बनाने का कार्य कर रहे हैं. जयकृष्ण पैन्यूली बताते हैं कि राजकीय सेवा में उन्हें जितना खाली समय मिलता है उसमें वें पेंटिंग बनाने का काम करते हैं.
जयकृष्ण पैन्यूली कहते हैं कि पर्वतीय इलाकों में संसाधनों का अभाव है. जब उनकी तैनाती भिलंगना ब्लॉक के एक स्कूल में हुई थी तो यहां कई ऐसे बच्चे थे जो आर्थिक रूप से कमजोर थे.इन बच्चों में नजर तो होती है लेकिन नजरिया नहीं होता है. बस यही नजरिया वें छात्रों को देने की कोशिश कर रहे हैं.जिससे छात्र इस प्रतिस्पर्धा भरी जिंदगी में आगे बढ़ सके.
कृत्रिम रंगों का नहीं करते हैं प्रयोग
शिक्षक जयकृष्ण पैन्यूली बताते हैं कि वें चित्रकारी में कृत्रिम रंगों या तैलीय रंगों का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करते हैं. इसके बजाय उन्हें मिट्टी से पेंटिंग बनाना अधिक पसंद है. जयकृष्ण पैन्यूली अभी तक कई शख्सियतों की पेंटिंग मिट्टी से तैयार कर चुके हैं. इनमें गॉड सचिन तेंदुलकर, गढ़रत्न नरेन्द्र सिंह नेगी शामिल है. इसके अलावा भी उन्होंने कई पोट्रेट तैयार किए हैं.जयकृष्ण पैन्यूली अभी तक 100 से भी ज्यादा पेंटिंग तैयार कर चुके हैं. जयकृष्ण पैन्यूली पेंटिंग बनाने के लिए मिट्टी, कोयले व राख का भी वें प्रयोग करते हैं.
लाल मिट्टी से शुरू किया था प्रयोग
रसायन विज्ञान के शिक्षक होने के बावजूद कुछ अलग करने की जिद ही उन्हें इस ओर ले गई. शुरुआती समय में प्रयोग के तौर पर उन्होंने सबसे पहले लाल मिट्टी से कागज पर पेंटिंग बनाई. लगातार 6-7 महीने प्रयोग करने के बाद उन्हें पूरी तरह यकीन हो गया कि मिट्टी को रंग के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. जयकृष्ण पैन्यूली बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से अलग-अलग रंगों की मिट्टी को एकत्र किया. जिससे वें अपने चित्रों को आकार देने लगे. साथ ही कोयले व राख का भी वें प्रयोग करते हैं.
पोट्रेट के बाद अब कैनवास की ओर
शिक्षक जयकृष्ण पैन्यूली बताते हैं कि पोट्रेट एकदम फोटो कापी के जैसी होती है. पोट्रेट आप किसी व्यक्ति की तस्वीर देख कर बनाते हैं. पद्मश्री अशोक चक्रधर से ने उन्हें पोट्रेट छोड़ कैनवास बनाने की सलाह दी. जयकृष्ण पैन्यूली के अनुसार कैनवास पर ऑयल कलर से पेंटिंग बनाना तो आसान है लेकिन मिट्टी से बनाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन धीरे-धीरे जब बेहतर परिणाम आने लगे तो उन्होनें कैनवास बनाना शुरू कर दिया. अब जरूरत पड़ने पर ही पोट्रेट बनाते हैं. जयकृष्ण पैन्यूली द्वारा बनाई गई तस्वीरों का विभिन्न कार्यक्रमों में प्रदर्शनी भी लगाई जाती है.
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FIRST PUBLISHED : December 16, 2023, 12:46 IST
