नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल के विकास में अंग्रेजों का अहम योगदान था. उनकी बनाई सड़कें और इमारतें आज भी इसकी गवाह हैं. नैनीताल की मशहूर माल रोड को लेकर अंग्रेजों ने कई नियम बनाए थे. आज भी इस सड़क का खास ख्याल रखा जाता है क्योंकि यह सड़क तल्लीताल को मल्लीताल क्षेत्र से जोड़ती है. यह बात हमेशा से सुनी-सुनाई है कि अंग्रेजों ने इस सड़क पर भारतीयों के चलने पर रोक लगाई हुई थी. नैनीताल निवासी प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक भ्रांति है, जिसे कुछ लोगों द्वारा फैलाया गया. ब्रिटिशकाल में भारतीय भी इस सड़क पर घूमते थे.
प्रोफेसर अजय रावत ने लोकल 18 से कहा कि नैनीताल का इतिहास अंतराष्ट्रीय इतिहास है. जब अंग्रेज भारत आए, तो उन्होंने उत्तराखंड और नैनीताल को बहुत महत्व दिया और यहां नॉन रेगुलेटिंग प्रोविंसन नियम लागू किए जबकि सम्पूर्ण भारत रेगुलेटिंग प्रोविंसन कानून के अंदर आता था. सिर्फ उत्तराखंड के नियम-कानून भारत के नियम कानूनों से अलग थे. साल 1841 में नैनीताल शहर का नगरीकरण हुआ. 1857 तक नैनीताल हेल्थ और टूरिस्ट सेंटर के रूप में उभरा.
अंग्रेजों के लिए सबसे सुरक्षित था नैनीताल
उन्होंने कहा कि वहीं साल 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नैनीताल अंग्रेजों के लिए सबसे सुरक्षित जगह थी. इस दौरान बरेली के कमिश्नर समेत कई अंग्रेज अधिकारियों ने नैनीताल में शरण ली थी और नैनीताल के स्थानीय निवासी लाला मोतीराम शाह, कुंदन लाला शाह और शाह मोहम्मद ने अंग्रेजों की आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी मदद की थी. वह बताते हैं कि नैनीताल के विकास में माल रोड का बेहद महत्व था लेकिन माल रोड पर चलना भारतीयों के लिए प्रतिबंधित था, यह सिर्फ भ्रांति है. नॉन रेगुलेटिंग प्रोविंस के चलते नैनीताल में अंग्रेजों की नीति दमनकारी नहीं थी और भारतीयों से मैत्रीपूर्ण व्यवहार था. जिस वजह से माल रोड पर भारतीयों को चलने का पूरा अधिकार था.
इस बात की गवाह है फोटो
प्रोफेसर रावत द्वारा दिए गए ब्रिटिश समय के एक फोटोग्राफ में भारतीय लोगों को माल रोड पर घूमते हुए साफ देखा जा सकता है, जो इस बात को प्रमाणित करता है कि भारतीय लोगों के लिए माल रोड पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं था. प्रोफेसर रावत कहते हैं कि साल 1858 में नैनीताल की माल रोड में भारत के पहले मेथोडिस्ट चर्च की स्थापना की गई थी. साल 1850 में माल रोड मल्लीताल रिक्शा स्टैंड के समीप मिशन स्कूल की स्थापना की गई, जिसे साल 1928 में चेतराम साह इंटर कॉलेज नाम दिया गया. यहां पढ़ने वाले बच्चे भी माल रोड से होकर स्कूल जाया करते थे. साथ ही उस दौर में नैनीताल में अंग्रेजों की संख्या कम थी और मेथोडिस्ट चर्च में प्रार्थना करने वाले ज्यादातर ईसाई लोग भारतीय थे, जो माल रोड से होकर ही चर्च जाते थे.
Tags: Local18, Nainital news, Nainital tourist places, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : July 15, 2024, 13:10 IST
