अरशद खान/ देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सहसपुर विधानसभा का एक छोटा सा गांव पौंधा (Pondha Village Dehradun) देश-विदेशों तक एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. यूं तो किसी जमाने में यहां के खेतों में गेहूं, धान और मंडुवे की फसल लहलहाती थी, लेकिन अब इन खेतों में स्कूल-कॉलेजों की इमारतें नजर आती हैं. स्कूल और कॉलेजों के निर्माण ने यहां के परिवेश व पर्यावरण को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है. यहां के ग्रामीणों का परिवेश इतनी तेजी से बदला है कि अब ये लोग खेती किसानी छोड़कर व्यवसायी बन गए हैं. ग्रामीणों ने हॉस्टल सुविधाएं, रेस्टोरेंट, वॉटर सप्लाई और टिफिन सर्विस जैसे कारोबार अपना लिए हैं.वहीं कुछ लोग इस डेवलपमेंट को फायदेमंद बता रहे हैं, तो कुछ इसे नुकसानदायक भी साबित कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र के तेजी से डेवलप होने के साथ-साथ वहां की आर्थिकी में भी सुधार होता है. साथ ही जमीनों के दामों में भी वृद्धि होती है. पौंधा गांव चूंकि एजुकेशन हब के रूप में पहचान बना रहा है, तो यहां के बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन भी घर के पास में ही मिल रही है. गांव के आसपास के क्षेत्रों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के साथ ही इंजीनियरिंग, मेडिकल, बीएड, बीपीएड, कंप्यूटर साइंस, बीएससी व एमएससी के दर्जनभर से अधिक कॉलेजों का संचालन हो रहा है. विदेशों तक से यहां बच्चे पढ़ने आ रहे हैं.
गांव में चौड़ी सड़क और पानी सप्लाई बड़ी समस्या
पौंधा गांव में पानी सप्लाई की गंभीर समस्या है. छात्र और बाहरी लोगों के अधिक होने से अब उतनी पानी की पूर्ति नहीं हो पाती है. इसी के साथ गांव के मुख्य मार्ग की चौड़ाई भी कम है, जबकि इस पर ट्रैफिक लगातार बढ़ता जा रहा है. यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं.
आसमान छूने लगे जमीनों के दाम
ग्राम पंचायत पौधा के ग्राम प्रधान सुधीर कहते हैं कि गांव की ज्यादातर जमीनें बाहर से आए बिजनेसमैन लोगों ने खरीद ली हैं और उन पर बड़े-बड़े हॉस्टल बना दिए हैं. इससे वे तो मोटी कमाई कर रहे हैं लेकिन गांव के लोग छोटे व्यापार और मजदूरी में सिमटकर रह गए हैं. जमीनों की अंधाधुंध खरीद-फरोख्त से उनके दाम भी बहुत बढ़ गए हैं. आज इस क्षेत्र में जमीनों के दाम 40000/गज तक पहुंच गए हैं.
नशा बिगाड़ रहा गांव की आबोहवा
पौंधा गांव भले ही एजुकेशन हब क्यों न बन गया हो लेकिन यहां की आबोहवा को नशा तेजी से खराब कर रहा है. युवाओं में नशे लत ग्रामीण परिवेश को बिगाड़ रही है. आए दिन स्थानीय लोगों को परिणाम भुगतने पड़ते हैं. लड़ाई-झगड़े इस क्षेत्र में अब आम बात हो गई है. लोग यहां पर कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी मांग कर रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : December 6, 2023, 11:08 IST
