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Public Opinion: उत्तराखंड राज्य बने 25 साल होने वाले हैं. देहरादून में शहरीकरण और उद्यम बढ़ा, लेकिन पहाड़ों में अब भी सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार की कमी है. राज्य गठन की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं. जानिए कहना है जनता का.
देहरादून. 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तरांचल राज्य बना था, जिसका नाम 2007 मे बदलकर उत्तराखंड रखा गया. इस साल राज्य को 25 साल होने जा रहे हैं. ऐसे में पिछले 25 सालों में उत्तराखंड में बहुत बदलाव आए हैं. क़ई लोगों का मानना है कि मैदानी जिलों में शहरीकरण और विकास हुआ तो क़ई लोग मानते हैं कि पहाड़ों पर आज तक बदहाल स्थिति बनी हुई है.
वहीं हरजिंदर सिंह बताते हैं कि राज्य आंदोलन के दौरान वह भी उसमें शामिल होते थे, जिस सपने को लेकर वे लड़ाई लड़ते थे. 25 साल बाद भी वे पूरे न हो सके. उन्होंने कहा कि कहा गया था कि पहाड़ का जंगल, जमीन, जवानी और पानी राज्य के विकास के लिए काम आएंगी, लेकिन जंगलों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है, भूमि खनन से खोदी जा रही है औऱ पहाड़ की जवानी यानी युवा अक्सर बेरोजगारी या भ्र्ष्टाचार को लेकर सड़कों पर उतर आते हैं. उन्होंने कहा कि जिस आशा को लेकर सभी ने राज्य गठन की लड़ाई लड़ी थी वह पूरी न हो सकी.
पौड़ी जनपद के मूल निवासी आलम सिंह रावत ने कहा कि वह पौड़ी जिले में क़ई बदलाव देख रहें हैं. पहले ट्रांसपोर्ट की ज्यादा सुविधा नहीं थी लेकिन अब काफी सहूलियत है, हलांकि पौड़ी जिला मुख्यालय के आसपास तो तमाम सुविधाएं हैं लेकिन दुर्गम गांवों में न आज सड़क पहुँच पाई है और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं, तभी क़ई बार मरीजों को चारपाई पर ले जाने के वीडियो वायरल होते हैं. उन्होंने बताया कि आज स्वास्थ्य सामुदायिक केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है जबकि पहले हुआ करते थे.
शहरों में चमकी सड़कें, उद्यम को मिली उड़ान
कुछ लोगों का मानना है कि राज्य बनने के बाद क़ई लोगों ने उद्यम और अच्छी नौकरी पाकर आजीविका चला रहें हैं. पवन सिंह रावत का कहना है कि उन्होंने सरकारी लोन लेकर अपना स्मॉल बिजनेस शुरू किया था, क़ई सरकारी योजनाओं से शहर के हालात सँवारे हैं और उद्यम को भी नई उड़ान मिली है, क़ई लोग देहरादून शहर के बदले स्वरूप और सौंदर्यीकरण से ख़ुश है तो क़ई लोग शहरीकरण और प्रदूषण के चलते देहरादून को पहले से खराब हालत में देख रहें हैं. प्रशांत का कहना है कि देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए साल 2019 से काम शुरू किया गया था लेकिन आज तक पूरी तरह से देहरादून स्मार्ट सिटी नहीं बन पाया. यहां कूड़े का अंबार, यातायात जाम का झाम और क्राइम से लेकर खराब आबोहवा ने शांत शहर को खराब बना दिया.
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल…और पढ़ें
पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों में रिपोर्टिंग से ल… और पढ़ें
