पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे पिथौरागढ़ में जिले से बाहर हुए ट्रांसफर, कैसे सुधरेंगे हालात?


हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़: सीमांत जिले पिथौरागढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है. पहले ही से हमेशा शिक्षकों की कमी का सामना पिथौरागढ़ जिले ने किया है, और इसकी गंभीरता अब और बढ़ गई है क्योंकि कई शिक्षक अन्य जिलों में ट्रांसफर हो गए हैं. इसका सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है. जिले में शिक्षा विभाग के अन्य जनपदों से शिक्षकों की भर्ती के बिना अद्यतित किये जाने से, इस विषय पर विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

पिथौरागढ़ के मुख्य शिक्षा अधिकारी एच एस जुकरिया ने बताया कि ट्रांसफर के संबंध में कुछ जानकारी प्राप्त हुई है और इससे पता चला है कि कई शिक्षक जिले से बाहर भेजे जा चुके हैं. वर्तमान में, 186 प्रवक्ता पदों और 51 सहायक अध्यापकों के ट्रांसफर हो चुके हैं, जिसमें से 129 शिक्षकों को जिले से बाहर भेजा गया है. उन्होंने इसके साथ ही बताया कि जिले में केवल 21 शिक्षकों की जॉइनिंग आनी बाकी है, और उन्हें अभी तक कोई सूचना नहीं मिली है.

500 से अधिक पद हैं रिक्त 

पिथौरागढ़ जिले में पहले से ही शिक्षकों के करीब 500 से अधिक पद रिक्त हैं और नए शिक्षकों की तैनाती की जरूरत है. इस कारण से जनता रोड़ों पर उतरकर अपनी मांग प्रकट कर रही है. सीमांत क्षेत्रों में धारचूला और मुनस्यारी जैसे क्षेत्रों में भी हालात खराब हैं, क्योंकि वहां महत्वपूर्ण विषयों के अध्यापकों की कमी है. शिक्षकों के ट्रांसफर के कारण पहले से मौजूदा शिक्षकों को भी अन्य जिलों में भेज दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी की भावना है. इस मुद्दे को हल करने के लिए उचित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा संकट को समाधान मिल सके.

उचित कार्रवाई की है डिमांड 

मुनस्यारी क्षेत्र के पंचायत सदस्य जगत सिंह मर्तोलिया नें इस मुद्दे के संबंध में चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि वे पहले से ही शिक्षा विभाग को इस मामले में ज्ञापन देने की कोशिश कर रहे थे, ताकि शिक्षकों को बिना नियुक्ति के नहीं छोड़ा जाए. इसके बावजूद भी, शिक्षकों का ट्रांसफर आगे बढ़ा है, जिससे सीमांत क्षेत्र के छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया जा रहा है. यह मामला चिंताजनक है और इसे हल करने के लिए उचित कार्रवाई की आवश्यकता है. यह मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचकर समाधान का विचार करने के लिए जांचा जाना चाहिए ताकि छात्रों को अपने शिक्षार्थी अवसरों में कोई बाधा ना हो.

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