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Uttarkashi Bear Attack: उत्तराखंड के उत्तरकाशी समेत पर्वतीय क्षेत्रों में भालुओं के बढ़ते हमले चिंता का विषय बन गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, भालुओं के इस असामान्य व्यवहार के पीछे मौसम में हो रहा बदलाव एक बड़ी वजह बताया जा रहा है. वहीं, लगातार हो रहे भालुओं के हमले से ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है. ग्रामीणों का कहना है कि भटवाड़ी क्षेत्र में आए दिन भालू के हमले हो रहे हैं.

बर्फबारी में देरी, भालुओं की ‘हाइबरनेशन’ पर असर
दिसंबर शुरू हो चुका है, लेकिन ऊंचाई वाले इलाकों में अभी तक बर्फबारी नहीं हुई है. सामान्यतः नवंबर तक भालू हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) में चले जाते हैं, लेकिन इस बार ठंड कम होने और बर्फ न गिरने के कारण भालू सक्रिय बने हुए हैं. इससे उनकी आक्रामकता भी बढ़ी है. वन विभाग के अनुसार, अब तक जिले में भालू 13 लोगों पर हमला कर चुके हैं, जिनमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं.

भालू आतंक से ग्रामीण दहशत में
वहीं, लगातार हो रहे भालुओं के हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है. डीएफओ डीपी बलूनी के अनुसार, उत्तरकाशी वन प्रभाग ने ‘एनॉयडर सिस्टम’ (ध्वनि आधारित डराने वाला उपकरण) लगाने की योजना तैयार की है, जिससे भालुओं को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखा जा सके. वन विभाग टीमें देर रात तक गश्त कर रही हैं. भटवाड़ी क्षेत्र में तो कई स्थानों पर स्कूल बच्चों को भी वन कर्मी सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचा रहे हैं.

भालू हमलों के आंकड़े चौंकाने वाले
भालुओं के हमले में इस वर्ष अब तक जिले में 5 लोगों की मौत हो गई है. वहीं, 72 लोग अभी तक भालू के हमले का शिकार हो चुके हैं. जिन्हें गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. दिन के समय भी भालुओं के हमलों ने ग्रामीणों को जंगल जाने से डरा दिया है. चारा, लकड़ी, बिछावन आदि लेने में भी लोग हिचक रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और भालू कई बार बस्तियों तक पहुंच जा रहे हैं.

उम्मीद-मौसम सुधरेगा, हालात भी सुधरेंगे
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य हुआ और बर्फबारी शुरू हुई, तो भालू स्वाभाविक रूप से शीतनिद्रा में चले जाएंगे. इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आने की संभावना है.

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