बागेश्वर मास हिस्टीरिया: पैरेंट्स नाराज, गांव में अफवाहें; और एक छात्रा की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल भेजी गई


रिपोर्ट – सुष्मिता थापा
बागेश्वर. रैखोली के जूनियर हाई स्कूल में छात्राओं के चीख चिल्लाकर बेहोश हो जाने की घटना के बारे में करीब एक हफ्ते में भी स्थितियां साफ नहीं हो सकी हैं. छात्र.छात्राओं का चीखना-चिल्लाना अब भी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. स्वास्थ्य विभाग की तीन दिन की काउंसलिंग के बाद भी बच्चों की हालत यह है कि सोमवार को फिर एक छात्रा की तबीयत स्कूल में बिगड़ गई, तो उसे जि़ला अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां छात्रा को 48 घंटे के ऑब्ज़र्वेशन में रखा जा रहा है. इधर बच्चियों के पैरेंट्स अस्पताल से बच्चों की छुट्टी चाह रहे हैं और कुछ का कहना है कि वो अपनी बेटी का स्कूल जाना बंद करवा सकते हैं.

बागेश्वर के रैखोली जूनियर हाई स्कूल की छात्रा को रात भर ऑब्ज़र्वेशन में रखने के बाद भी डाॅक्टरों को कुछ विशेष जानकारी नहीं मिली. जिला अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टर चंद्र सिंह भैसोड़ा ने बताया कि छात्रा के ब्लड टेस्ट और अन्य परीक्षणों की रिपोर्ट में सब ठीक रिजल्ट आए हैं. इससे पहले एसीएमओ हरीश पोखरिया ने कहा था कि अन्य बच्चों को भी अस्पताल लाया गया था, लेकिन उनके नाॅर्मल होने के बाद उन्होंने सकूल जाॅइन कर लिया है और कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन सोमवार शाम से ऑब्ज़र्वेशन में रखी गई छात्रा के परिजन डाॅक्टरों से छात्रा को डिस्चार्ज करने की बात कर रहे हैं.

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स्कूल में आज 2 अगस्त को 54 में से 44 बच्चे प्रेजेंट रहे और आज स्कूल में शांति रही. इधर, बुधवार को टीचर-पैरेंट्स मीटिंग के बाद स्कूल में पूजा पाठ करवाने के बारे में कुछ कार्यक्रम तय किया जा सकता है. आपको बता दें कि पिछले एक हफ्ते से रैखोली जूनियर हाई स्कूल की कुछ छात्राएं अचानक ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगती हैं. 27 जुलाई को कुछ छात्राएं चीखकर बेहोश भी हुई थीं. इस मामले में न स्कूल के शिक्षिकों को और न ही डॉक्टरों को काई सटीक कारण पता चल रहा है.

कल जिस बच्ची की हालत बिगड़ी और उसे ज़िला अस्पताल लाया गया, उसकी मां का कहना है कि स्कूल जाते ही बच्चों की तबीयत खराब हो रही है. अगर यही हाल रहा तो वह बेटी को स्कूल भेजना बंद कर देगी.

जांच के नाम पर अब तक क्या हुआ?

एक हफ्ते पहले रैखोली के स्कूल में हुए घटनाक्रम को मास हिस्टीरिया बताया गया था. स्कूल और बागेश्वर ज़िला प्रशासन ने हालांकि तुरंत किसी तरह की काउंसिलिंग या इलाज करवाने के बजाय सभी पीड़ित बच्चियों को घर बैठा दिया. इन छात्राओं के अभिभावकों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर मासूम बच्चियों को हुआ क्या. प्रशासन इसे दबी जुबान में मास हिस्टीरिया कह रहा है, तो ग्रामीण इसे भूत प्रेत से देखकर जोड़ रहे हैं. गांव में तरह तरह की अफवाहें फैल रही हैं, प्रशासन तक भी पहुंच रही हैं.

भूत या डर? आखिर क्या है रहस्य?

रैखोली के रहने वाले जिला पंचायत सदस्य चंदन रावत ने बताया, गांव में चर्चा है कि एक महिला फांसी पर झूली थी, जिसे एक छात्रा ने देख लिया था. दूसरी चर्चा है कि स्कूल की आठवीं क्लास में अंग्रेज का भूत है. बच्चे इतना डरे हुए हैं कि क्लास में जाने से डर रहे हैं और बाहर बरामदे में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं. इन मासूमों को समझाने न स्कूल के शिक्षिक आगे आ रहें हैं और न जांच अधिकारी. काउंसिलिंग के नाम पर भी बच्चों को बस विटामिन की दवाई देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है.

Tags: Bageshwar News, Uttarakhand school

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