कोटा। कोटा-लालसोट मेगा स्टेट हाइवे पर लोगों की जान दांव पर लगी है। टोल टैक्स चुकाने के बाद भी राहगीरों का सफर सुरक्षित नहीं है। सार्वजनिक निर्माण विभाग की शह पर रिडकोर कम्पनी मनमानी कर रही है। जमकर टोल टैक्स वसूल किया जा रहा लेकिन जानलेवा गड्ढ़ों को भरवाया नहीं गया। नतीजन, वाहन चालक हादसों के शिकार हो रहे। दिन की अपेक्षा रात को हादसे का खतरा दो गुना बढ़ जाता है। हाइवे पर बिजली नहीं होने से अंधेर में गहरे गड्ढ़े दिखाई नहीं देते। ऐसे में वाहन चालक दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। लोगों की शिकायत के बावजूद पीडब्ल्यूडी विभाग के जिम्मेदार रिडकोर से सड़कों की मरम्मत नहीं करवा सकी। कोटा से केपाटन तक जानलेवा गड्ढ़े : कोटा में पाटन तिराहा से मेगा स्टेट हाइवे शुरू हो जाता है। यहां से केशवरायपाटन तक 26 किमी के रास्ते पर 35 से 40 जानलेवा गड्ढ़े हो रहे हैं। इस बीच कई जगहों पर 5 फीट लंबा और 3 फीट चौड़े गड्ढ़े हो रहे हैं, जो वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बने हुए हैं। पाटन तिराहा से भवानीपुरा गांव के पास हाइवे की डामर सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है। सड़क पर गिट्टियां फैली हुई है। जबकि, इस रोड से बड़ी संख्या में वाहन चालकों का आवागमन रहता है। रात के समय हादसे का खतरा अधिक रहता है, हाइवे पर रात को रोड लाइटें नहीं हैं।
वाहन चालकों की जान की नहीं परवाह
कोटा-लालसोट हाइवे का संचालन रिडकोर कम्पनी द्वारा किया जा रहा है। सरकार ने यह हाइवे 2035 तक कम्पनी को लीज पर दिया है। टोल वसूलने से लेकर हाइवे का मेंटिनेंस तक की जिम्मेदारी रिडकोर की है। लेकिन, कम्पनी का ध्यान सिर्फ टोल वसूलने पर है, वाहन चालकों की जिंदगी से कोई सरोकार नहीं है। जगह-जगह रोड कटे हुए हैं। ह्य
3 फीट चौड़े गड्ढ़ों से मौत का खतरा
गुमानपुरा निवासी वरिष्ठ अध्यापक विजय गौतम ने बताया कि वे केशवरायपाटन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। स्कूल जाने के लिए प्रतिदिन अपडाउन करते हैं। गामछ फ्लाई ओवर शुरू होने से पहले ही हाइवे की सड़क पर 5 फीट लंबा और 3 फीट चौड़ा गड्ढ़ा हो रहा है। साथ ही गिट्टी भी फैली हुई हैं। जिससे आए दिन दुर्घनाएं होती है। टोल प्लाजा पर शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं होता।
गड्ढ़ों से बचने को गलत लेन में घुस रहे बाइक सवार
भवानीपुरा निवासी गोपाल सिंह, प्रभुलाल कहार, महावीर केवट बताते हैं, भवानीपुरा, गिरधरपुरा, गामछ व गुडली गांव तक दर्जनों गड्ढ़े हो रहे हैं। बीच-बीच में सड़कें जर्जर हो रही है। आवागमन के दौरान बाइक सवार गड्ढ़ों से बचने के लिए चार पहिया वाहनों की लेन में आ जाते हैं।जिससे दुर्घटनाएं होती है।
लाखों का टोल फिर भी खतरे में जानह्ण
कोटा-लालसोट मेगा स्टेट हाइवे की दूरी कोटा से दौसा तक करीब 230 किमी है। हाइवे से प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन चालकों का आवगमन रहता है। लाखों का टोल टैक्स वसूलती है। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत नहीं करवाई जाती। लोगों की स्लीप डिस्क की समस्या बढ़ गई। वहीं, वाहनों का मेंटिनेंस भी बढ़ गया। कोटा से केशवरायपाटन आने-जाने के ही कार सवार से 120 रुपए टोल वसूला जाता है।
सरकार ने कोटा-लालसोट मेगा स्टेट हाइवे का संचालन वर्ष 2035 तक लीज पर रिडकोर कम्पनी को दिया हुआ है। ऐसे में टोल वसूली से लेकर मेंटिनेंस तक सारा काम कम्पनी द्वारा ही किया जाता है। चूंकि यह रोड बूंदी जिले से गुजर रहा है, ऐसे में इसकी देखरेख की जिम्मेदारी हमारी भी बनती है। बरहाल, मैंने पहले और आज भी कम्पनी के उच्चाधिकारी को सड़क की दुर्दशा से अवगत करा मरम्मत के लिए बोला है। उन्होंने जल्द ही मेंटिनेंस शुरू करने को कहा है।
– वीके जैन, एसई पीडब्ल्यूडी बूंदी
रोड का मेजरमेंट ले लिया गया है। जल्द मेंटिनेंस कार्य शुरू करवाकर अगले सप्ताह तक काम पूरा करवा दिया जाएगा।
– राहुल पाटिल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, रिडकोर कम्पनी जयपुर
