सड़कों पर मौत बनकर बेखौफ वाहन दौड़ा रहे नाबालिग

कोटा। शहर के प्रमुख चौराहों पर नाबालिग खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस की आंखों के सामने न केवल वाहन दौड़ा रहे बल्कि मोटरयान नियमों का भी मखौल उड़ा रहे हैं। जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण नाबालिग खुद के साथ अन्य वाहन चालकों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं। जबकि, कुछ माह पहले ही गुमानपुरा फ्लाईओवर से गिरकर नाबालिग बाइक चालक की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके बावजूद न ट्रैफिक पुलिस और न ही अभिभावकों ने सबक लिया। नतीजन, चौराहों पर हर दिन हादसे हो रहे हैं। इसका ताजा उदारहण हाल ही में नाबालिग वाहन चालक द्वारा कार को टक्कर मारने के बाद कार सवार युवकों द्वारा अपहरण कर पिता से पैसे मांगने का मामला भी सामने आ चुका है। फिर भी पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।  शहरवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों पर दैनिक नवज्योति ने सोमवार को शहर के व्यस्तम चौराहों का जायजा लिया तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। पेश हैं खबर के प्रमुख अंश…

स्कूटी-बाइक से स्कूल जा रहे नाबालिग
शहर के स्कूलों में नाबालिग छात्र बाइक और छात्राएं स्कूटी लेकर स्कूल पहुंच रहे हैं। दोपहर को छुट्टी होने के बाद मुख्य चौराहों पर बेखौफ फर्राटे भर रहे हैं। जबकि, नाबालिगों का वाहन चलाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है, फिर भी न तो अभिभावकों को परवाह है और न ही शिक्षकों को। यही वजह है शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नाबालिग वाहन चालकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 

जिम्मेदारों की चुप्पी बर्बाद कर रही भविष्य
नाबालिगों के वाहन चलाने के कारण दुर्घटना का खतरा बना रहता है।  किशोर बगैर हेलमेट के तेज गति से बाइक चलाते सड़कों पर दिख रहे हैं लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ये नाबालिग किसकी अनुमति से सड़क पर वाहन दौड़ा रहे हैं, इस प्रश्न पर पुलिस, परिवहन अधिकारी, यातायात विभाग सभी चुप्पी साधे हैं। ट्रैफिक पुलिस को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है।

हादसों का कारण बन रहे नाबालिग
शहर के विभिन्न इलाकों नाबालिग छात्र पावर बाइक स्पीड से दौड़ा रहे हैं। आगे चल रहे वाहनों को ओवरटेक कर रोंग साइड आ जाते हैं। ऐसे में अपनी लेन में चल रहे वाहनों से टकरा जाते हैं। सड़कों पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। अधिकतर मामले समझाइश के कारण थाने तक नहीं पहुंचते। हालात यह है कि अभिभावकों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के हाथों में बाइक व रेसिंग स्कूटर थमा दिए हैं। पिछले 9 माह पहले ही गुमानपुरा पुलिया से 40 फीट नीचे गिरने से 9वीं कक्षा के छात्र अंशु की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी, अभिभावक व स्कूल संचालक बेपरवाह बने हुए हैं। 

सीएडी से घोड़ा सर्किल तक बाइक दौड़ा रहे छात्र
नवज्योति टीम दोपहर डेढ़ बजे सीएडी व घोड़ा सर्किल पर पहुंची। जहां कॉन्वेंट स्कूलों की छुट्टी होने के बाद बड़ी संख्या में नाबालिग वाहन चालक सीएडी से घोड़ा सर्किल तक बाइक दौड़ाते हुए नजर आए। जबकि,  यहां सर्किल पर ट्रैफिक पुलिस के जवान मौजूद थे। इसके बावजूद न तो उन्हें पाबंद किया और न ही स्कूल संचालकों से समझाइश की। 

स्कूल प्रबंधन भी लापरवाह 
शहर के अधिकतर निजी स्कूलों में बाइक व स्कूटी से छात्र-छात्राओं के स्कूल पहुंचने के नजारे आम है। निजी और सरकारी सभी स्कूल के साइकिल स्टैंड पर छात्र-छात्राओं की बाइक व स्कूटी खड़ी रहती हैं। हायर सेकेंडरी तक में पढ़ने वाले सभी बच्चे 18 से कम उम्र के रहते हैं। स्कूल प्रबंधन को यह भी पता होता है कि जो बच्चे बाइक या स्कूटी से आ रहे हैं, वे नाबालिग हैं इसके बावजूद एक्शन नहीं लिया जाता। 

समझाइश के बाद भी नहीं माने तो कार्रवाई
नाबालिग बच्चों को स्कूल जाने के लिए बाइक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अभिभावकों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे बाइक लेकर बाहन न जाएं। अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों की समझाइश करेंगे। साथ ही स्कूलों में जाकर जागरूक करेंगे, संचालकोें को नाबालिग छात्रों को बाइक लेकर स्कूल न आने देने के लिए पाबंद करेंगे। इसके बावजूद नाबालिग वाहन चलाते मिले तो उनके अभिभावकों के खिलाफ उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 
– राजेश ढाका, पुलिस उपाधीक्षक, यातायात 

बैठक में उठाएंगे मामला
स्कूली छात्रों का वाहन चलाना चिंताजनक है। स्कूल एसोसिएशन की बैठक में यह मामला उठाएंगे। शाला संचालकों के साथ मिलकर प्रार्थना सभा में बच्चों को मोटर यान नियमों की जानकारी देकर जागरूक करने की पहल करेंगे। वहीं, पीटीएम में अभिभावकों की भी समझाइश करेंग कि वे अपने बच्चों को बाइक-स्कूटी देकर स्कूल न भेजे। 
– जमना शंकर प्रजापति, जिलाध्यक्ष, निजी स्कूल संचालक संघ कोटा 

एक्सपर्ट व्यू वाहन स्वामी पर 25 हजार तक का जुर्माना
किसी भी सार्वजनिक स्थान पर 16 वर्ष की उम्र पूरी कर चुका किशोर 50सीसी  क्षमता तक का वाहन चला सकता है लेकिन इस सीसी के वाहन अब बंद हो चुके वहीं, 18 वर्ष से अधिक के युवक वाहन चलाने के लिए अनुज्ञा पत्र प्राप्त करके अधिकृत हो जाता है। यदि, इस उम्र के व्यक्ति के पास अनुज्ञा पत्र नहीं है तो उसे 3 माह तक का कारावास या 5000 तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। लेकिन कोई भी किशोर मोटरयान अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करता है तो ऐसी स्थिति में अपराध की गंभीरता बढ़ जाती है और वाहन स्वामी को 3 वर्ष तक का कारावास या 25000 तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा। साथ ही ऐसा किशोर 25 वर्ष की उम्र से पहले लाइसेंस प्राप्त करने का अधिकार खो देगा और 12 माह की अवधि के लिए वाहन की आरसी भी रदद की जा सकती है। ट्रांसपोर्ट व्हीकल के लिए न्यूनतम उग्र 20 वर्ष है। 
– विवेक नंदवाना, वरिष्ठ अधिवक्ता