हितेश कुनियाल ने रचा इतिहास, जानें क्या है ‘द हिमालय खारदुंगला’ चैलेंज


सोनिया मिश्रा/चमोली. राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहाड़ के युवाओं ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी मेहनत और लगन से अपना लोहा मनवाया है. उन्हीं में से एक हैं उत्तराखंड के चमोली जिले के ‘द हिमालय खारदुंगला चैलेंज’ पार करने वाले हितेश कुनियाल. जिले के दूरस्थ क्षेत्र देवाल के देवस्थली गांव के हितेश ने लगातार दूसरे साल भी दुनिया की सबसे ऊंची अल्ट्रा मैराथन रेस खारदुंगला को 10 घंटे 40 मिनट में पूरा कर लिया है.

जबकि दौड़ को पूरी करने के लिए सभी प्रतिभागियों को 12 से 13 घंटे का समय दिया गया था. हितेश बताते हैं कि उनकी दौड़ सुबह 3 बजे शुरू हुई, जिस समय तापमान एक डिग्री था और जैसे जैसे धावक ऊपर चढ़ाई पर चढ़ते गए, तापमान शून्य से भी नीचे गिरता रहा. साथ ही वह बताते हैं कि इतनी ऊंचाई में ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है, जिसके कारण कई प्रतिभागी दौड़ पूरी न कर सके.

हितेश कुनियाल इवान टेक्नोलॉजी देहरादून में कार्यरत हैं. वह धावक होने के साथ साथ समाजसेवी भी हैं. हितेश बताते हैं कि पिछले दो सालों से उनकी ‘द पीपल्स ग्रुप’ संस्थाविभिन्न सामाजिक कार्यों जैसे- पशु चिकित्सा, पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, गरीब बच्चों की शिक्षा और पहाड़ के स्कूलों में लाइब्रेरी पर काम कर रही है.


क्या है द हिमालय खारदुंगला चैलेंज?
द हिमालय खारदुंगला चैलेंज (72 किमी) दुनिया की सबसे ऊंची अल्ट्रा मैराथन है. यह दौड़ उन गंभीर धावकों के लिए सबसे कठिन और अंतिम चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति दौड़ में से एक है जो, अपनी सीमाओं को चरम तक ले जाना चाहते हैं. रेस को कठोर परिस्थितियां इसे बेहद कठिन बनाती हैं क्योंकि लगभग 60 किमी की दौड़ 4000 मीटर (14000 फीट) से ऊपर दौड़ी जाती है. जिस कारण इस दौड़ में भाग लेने वाले अधिकतम प्रतिभागियों की संख्या 200 तक ही सीमित है.

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