163 साल पुराना है देहरादून का ये पुल, सुंदर कारीगरी देख पर्यटकों की लगती है भीड़, आप भी पहुंचे यहां


अरशद खान/देहरादून: देहरादून के टूरिस्ट प्लेस मालदेवता को शायद ही कोई होगा जो नहीं जानता होगा. बहुत सारे लोग इस जगह को अक्सर एक्सप्लोर करने आते रहते हैं यहां के हिडन प्लेस, कैफे, मैगी प्वाइंट को ज्यादातर लोग एक्सप्लोर करते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसी ऐतिहासिक इबारत देहरादून के मालदेवता में दिखाने वाले हैं जिसको देखकर आप वाकई हैरान हो जाएंगे. जी हां यह कोई इमारत, कोई भवन, या कोई कैफे नहीं बल्कि अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया एक पुल है.

यह पुल मालदेवता के स्थल में मौजूद हैं इसके बारे में कहा जाता है कि यह पुल 163 साल पुराना है. लेकिन आज भी इस पुल के नीचे से सहस्त्रधारा से आने वाली बालदी नदी बहती है और पुल के ऊपर से मालदेवता से आने वाली सॉग नदी और बांदल नदी का पानी खलंगा नहर के रूप में बहता है. इस पुल पर की गई अंग्रेजी अधिकारी कैप्टन प्रोविक गोडले की कारीगरी की आज भी हर कोई तारीफ करता है. यह जल सेतू आज भी इंजीनियरिंग को कड़ी चुनौती दे रहा है इसी पुल की तर्ज पर हरिद्वार में गंगनहर का निर्माण किया गया था जिसे बाद में उत्तरप्रदेश की लाइफलाइन कहा जाने लगा.

पर्यटकों के लिए बना सेल्फी अड्डा
रायपुर के स्थल में नए पुल के जस्ट बराबर में यह एक पुराना खंडहरनुमा पूल भी अक्सर लोगों को यहां से गुजरते हुए नजर आता है. कुछ लोग तो इसके इतिहास के बारे में जानते हैं लेकिन कुछ लोग इसके ऐतिहासिक रूप से बिल्कुल अनजान होते हैं. लोग यहां पर सेल्फी खींचते हैं और इस पुल पर बैठकर एकांत में अपना समय व्यतीत करते हैं. आए दिन सैकड़ो की तादाद में युवा इस पुल पर अपना फोटो शूट करते हुए नजर आते हैं कई लोग यहां पर रील और अपने ब्लॉग भी शूट करते हैं.

ऐतिहासिक धरोहरों को रखें सेफ
यहां के स्थानीय लोगों को कुछ सामाजिक तत्वों से काफी दिक्कतें हैं जो स्कूल पर आकर नशे का सेवन करते हैं और हुड़दंग वह चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने लोकल 18 के माध्यम से सरकार से गुजारिश की है कि इस तरह के ऐतिहासिक धरोहरों की पैरवी की जाए और हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

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