हरिपुर नायक/नैनीताल. हल्द्वानी के लोगों के लिए खतरा बने बाघ को आखिरकार आदमखोर घोषित कर दिया गया है. यह बाघ अभी तक पांच लोगों की जान ले चुका है, जिसके बाद लोग लगातार इसे आदमखोर घोषित करने की मांग कर रहे थे. फॉरेस्ट की फतेहपुर रेंज के रेंजर केआर आर्या ने बताया कि वाइल्डलाइफ वार्डन के आदेश पर इस बाघ को नरभक्षी घोषित कर दिया गया, जिसे मारने के आदेश हो चुके हैं. अब फॉरेस्ट डिपार्टमेंट (Forest Department) इलाके में शिकारी तैनात करेगा, जो बाघ को मार सकें. इधर, जंगली जानवरों और इंसानों के बीच संघर्ष और बाघों के आतंक को कम करने के मकसद से नैनीताल में एक प्रयोग शुरू किया जा रहा है.
हल्द्वानी के आसपास एक बाघ पिछले 4 महीने में आधा दर्जन हमले कर चुका है, जिनमें 5 की जान जा चुकी है. गुरुवार को ही एक महिला और आदमखोर का शिकार बनी. दमुआढुंगा की रहने वाली यह महिला मवेशियों के लिए चारा लेने जंगल गई थी. इसी दौरान बाघ ने महिला पर हमला बोल दिया. इससे पहले इलाके में चार महिलाओं की जान बाघ के हमले में जा चुकी है. दमुआढुंगा और फतेहपुर में दहशत का आलम है. अब फॉरेस्ट विभाग को ऐसे शिकारियों की तलाश है, जो बाघ के शिकार में महारत रखते हों.
कैमरा ट्रैप में दिखे बाघ
बाघ की मॉनिटरिंग के लिए फॉरेस्ट टीम ने जंगल में 20 कैमरे लगाए हुए हैं. इनमें चार अलग-अलग बाघों को फोटो कैद हुई है. ऐसे में फॉरेस्ट टीम के सामने नरभक्षी बाघ को खोजना किसी चुनौती से कम नहीं है. फॉरेस्ट के तीन डॉक्टर्स ट्रेंकुलाइज़ गन के साथ जंगल में गश्त कर रहे हैं. कॉर्बेट नेशनल पार्क से ट्रेंड हाथियों को भी इस काम में लगाया गया है, लेकिन इसके बावजूद नरभक्षी बाघ चुनौती बना हुआ है.
आदमखोरों के हमले कम करने का स्पेशल प्लान
गुलदारों और बाघों के बढ़ते हमलों को कम करने के लिए वन विभाग ने पटवाडांगर में लाल लोमड़ी यानी रेड फॉक्स ब्रीडिंग सेंटर का प्लान बनाया है. न्यूज़18 संवाददाता वीरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट के अनुसार 5 हेक्टेयर में सेंटर को 97 लाख में तैयार करने की योजना है. कैम्पा के तहत इस योजना का मकसद गुलदारों और सुअरों के साथ खूंखार जानवरों की संख्या कंट्रोल करना है. योजना का एक मकसद विलुप्ति की कगार पर पहुंचे लाल लोमड़ियों को ब्रीडिंग के लिए जंगल में छोड़ना भी है. हांलाकि अभी इस योजना पर सरकारी बजट और मुहर बाकी है.
कैसे कम होंगे बाघों, गुलदारों के हमले?
दरअसल लाल लोमड़ी पर्यावरण संतुलन के लिए ज़रूरी है लेकिन पिछले कुछ सालों में शिकार और अन्य वजहों से ये विलुप्त हो रही प्रजातियों की श्रेणी में आ गई. परिणाम ये है कि पहाड़ों में गुलदारों और सुअरों की संख्या तेज़ी से बढ़ गई. पर्यावरणविद और पद्मश्री से सम्मानित अनूप साह कहते हैं कि पर्यावरण में इन रेड फॉक्स उतनी ही ज़रूरी है, जितने बाघ और मेढक. डीएफओ बीजूलाल टीआर का कहना है चूंकि रेड फॉक्स सुअरों, गुलदारों और बाघों के शावकों को खाता है इसलिए इसका महत्व पर्यावरण संतुलन के लिए काफी अहम है.
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