रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. आजकल के दौर में बच्चे हिपहॉप या फिर अन्य स्टाइल के डांस में ज्यादा रुचि रखते हैं. धीरे-धीरे क्लासिकल डांस को लोग भूलते जा रहे हैं. इसी को देखते हुए उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के शारदा पब्लिक स्कूल में वर्कशॉप के माध्यम से बच्चों को कथक नृत्य सिखाया जा रहा है. करीब 15 दिन की इस वर्कशॉप में बच्चे यहां पर कथक की अलग-अलग विधाएं सिखा रहे हैं. जिसे वृंदावन से आए कथक गुरु आशीष सिंह सिखा रहे है. आशीष वैसे तो रहने वाले काशी के हैं, पर वृंदावन में रहकर कथक नृत्य को बढ़ावा दे रहे हैं. शारदा स्कूल के बच्चे कथक नृत्य को सिखने के लिए रुचि दिखा रहे हैं.
छात्रा मानसी दानू ने कहा कि उनके स्कूल में कथक सिखाया जा रहा है. स्कूल की प्रिंसिपल विनीता शेखर बच्चों को काफी प्रोत्साहित करती हैं. नृत्य की यह विधा सीखकर उन्हें काफी अच्छा लग रहा है क्योंकि क्लासिकल डांस में कई फॉर्म हैं. वृंदावन से आए सर काफी अच्छा सिखा रहे हैं. हमें बहुत कुछ नया सीखने को मिल रहा है.
पढ़ाई के साथ-साथ कथक सीखने का मौका
छात्रा लता तिवारी ने बताया कि स्कूल में इस तरह का मौका बहुत ही कम जगह मिलता है. उनके स्कूल में कथक सिखाया जा रहा है. वृंदावन से आए आशीष सर पहले भी आए थे और उनके द्वारा काफी अच्छी तरह से इस डांस फॉर्म को सिखाया जाता है. पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे डांस भी सीख रहे हैं और उन्हें काफी अच्छा लग रहा है. इस तरह की एक्टिविटी करने से स्ट्रेस भी काम होता है क्योंकि स्कूल के बाद घर जाकर ट्यूशन जाना पड़ता है, जिस वजह से अपने लिए समय नहीं निकाल पाते हैं, पर स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ कथक नृत्य भी सीखने का मौका मिल रहा है.
बच्चों में बढ़ी कथक सीखने की रुचि
कथक गुरु आशीष सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा अपनी संस्कृति को दर्शाती है. आजकल के समय में बच्चे वेस्टर्न डांस और अन्य डांस में रुचि रखना पसंद करते हैं, पर अल्मोड़ा के बच्चे क्लासिकल डांस और कथक नृत्य में रुचि दिखा रहे हैं. वह अल्मोड़ा कई बार आ चुके हैं और बच्चों को कथक नृत्य भी सिखा चुके हैं. अल्मोड़ा के बच्चों को यदि मौका मिले, तो वे आगे जाकर बेहतर कर सकते हैं, पर सुविधा न होने की वजह से वह आगे नहीं बढ़ पाते हैं.
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FIRST PUBLISHED : February 20, 2024, 10:01 IST
